Delhi में ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान RAF की कार्रवाई गलत, खुद फोर्स ने मानी गलती
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भीड़ को काबू करने के लिए जिस तरह का बल प्रयोग किया गया, वह नियमों के खिलाफ था। यह बात खुद रैपिड ए
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भीड़ को काबू करने के लिए जिस तरह का बल प्रयोग किया गया, वह नियमों के खिलाफ था। यह बात खुद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने एक आंतरिक समीक्षा के बाद स्वीकार की है। फोर्स ने माना कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए तरीके उनके ट्रेनिंग स्टैंडर्ड और तय नियमों के मुताबिक नहीं थे।
इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए 22 जुलाई 2026 को आईजी (RAF) सीमा धुंधिया ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग की थी। इस मीटिंग में पाया गया कि मौके पर तैनात जवानों को समय पर सही ब्रीफिंग नहीं दी गई थी। साथ ही सेक्टर हेडक्वार्टर को भी इस बात की पूरी जानकारी नहीं थी कि कंपनियां कहां तैनात हैं और वहां क्या गतिविधियां चल रही हैं।
गलतियों को सुधारने के लिए आईजी सीमा धुंधिया ने सख्त निर्देश दिए हैं। अब अगले आदेश तक दिल्ली में तैनात जवानों को प्रोजेक्टाइल अटैक गन (PAG), एंटी-रायट गन (ARG), इलेक्ट्रिक शॉक वेपन्स और इलेक्ट्रिक शील्ड नहीं दी जाएंगी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि उनके पास PAG गन नहीं हैं, लेकिन ये उपकरण RAF के स्टैंडर्ड गियर का हिस्सा होते हैं।
RAF नेतृत्व ने साफ किया कि भीड़ को नियंत्रित करते समय बल का प्रयोग हमेशा धीरे-धीरे और जरूरत के हिसाब से ही होना चाहिए। बिना वजह या जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई थी।
इस विरोध प्रदर्शन में सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल से जुड़ी मांगों और NEET-UG की अनियमितताओं को लेकर लोग जुटे थे। इस टकराव में कई प्रदर्शनकारियों और 47 RAF जवानों के घायल होने की खबर है। अब CRPF इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है कि जवानों ने कैसे काम किया और क्या उन्हें किसी तरह के उकसावे का सामना करना पड़ा था।