Rajasthan: अब दिल्ली-आगरा-अजमेर और सीकर रोड पर सफर करने वाले लोगों के लिए सड़क सुरक्षा और आसान होगी। जयपुर रेंज पुलिस ने एक नया QR कोड सिस्टम शुरू किया है जिससे ड्राइवर उन जगहों की पहचान कर सकेंगे जहां हादसे ज्यादा होते
Rajasthan: अब दिल्ली-आगरा-अजमेर और सीकर रोड पर सफर करने वाले लोगों के लिए सड़क सुरक्षा और आसान होगी। जयपुर रेंज पुलिस ने एक नया QR कोड सिस्टम शुरू किया है जिससे ड्राइवर उन जगहों की पहचान कर सकेंगे जहां हादसे ज्यादा होते हैं। इस डिजिटल पहल का मकसद हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों को पहले से सावधान करना है।
QR कोड स्कैन करने पर क्या जानकारी मिलेगी?
जब यात्री टोल प्लाजा, पुलिस स्टेशन या ट्रांसपोर्ट हब पर लगे QR कोड को स्कैन करेंगे, तो उनके फोन पर Google Map खुलेगा। इस मैप में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट्स को तीन रंगों में दिखाया गया है। लाल रंग उन जगहों के लिए है जहां पिछले तीन साल में 20 से ज्यादा मौतें हुई हैं। नारंगी रंग 10 से 20 मौतों वाली जगहों के लिए और पीला रंग 10 से कम मौतों वाले क्षेत्रों को दर्शाता है।
NHAI और MoRTH की अन्य योजनाएं क्या हैं?
NHAI अब नेशनल हाईवे पर प्रोजेक्ट इंफॉर्मेशन साइन बोर्ड लगाने जा रहा है जिनमें QR कोड होंगे। इससे यात्रियों को हाईवे नंबर, प्रोजेक्ट की लंबाई और इमरजेंसी हेल्पलाइन 1033 जैसी जरूरी जानकारी मिलेगी। साथ ही पास के अस्पताल, पेट्रोल पंप और EV चार्जिंग पॉइंट की लोकेशन भी पता चलेगी। MoRTH ने ब्लैक स्पॉट की परिभाषा तय की है, जिसके तहत 500 मीटर का वह हिस्सा ब्लैक स्पॉट माना जाता है जहां तीन साल में 5 या उससे ज्यादा गंभीर हादसे या 10 से ज्यादा मौतें हुई हों।
यह सिस्टम किन इलाकों में लागू होगा?
जयपुर रेंज पुलिस की यह पहल मुख्य रूप से जयपुर, दौसा, झुंझुनूं, अलवर और सीकर जिलों के हाईवे पर लागू होगी। इसके अलावा MoRTH और NHAI की योजनाएं पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू की जाएंगी ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ब्लैक स्पॉट क्या होता है?
नेशनल हाईवे का वह 500 मीटर का हिस्सा जहां पिछले तीन सालों में 5 या उससे ज्यादा गंभीर हादसे या 10 से ज्यादा मौतें हुई हों, उसे ब्लैक स्पॉट कहा जाता है।
QR कोड स्कैन करने पर मैप में रंगों का क्या मतलब है?
लाल रंग का मतलब है हाई रिस्क (20+ मौतें), नारंगी का मतलब मीडियम रिस्क (10-20 मौतें) और पीले का मतलब लो रिस्क (10 से कम मौतें) है।