Bihar: पूर्णिया में उत्तर बिहार का पहला डॉप्लर वेदर रडार लगाया जा रहा है। इससे सीमांचल और उत्तर बिहार के इलाकों में मौसम की जानकारी पहले से कहीं ज्यादा सटीक मिलेगी। यह सिस्टम मानसून आने से पहले ही काम करना शुरू कर देगा,
Bihar: पूर्णिया में उत्तर बिहार का पहला डॉप्लर वेदर रडार लगाया जा रहा है। इससे सीमांचल और उत्तर बिहार के इलाकों में मौसम की जानकारी पहले से कहीं ज्यादा सटीक मिलेगी। यह सिस्टम मानसून आने से पहले ही काम करना शुरू कर देगा, जिससे भारी बारिश और तूफान जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
डॉप्लर रडार से किन जिलों को होगा फायदा
यह एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार (DWR) करीब 150 से 200 किलोमीटर के दायरे को कवर करेगा। इसका सीधा फायदा पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और भागलपुर जैसे जिलों को मिलेगा। इसके अलावा यह रडार पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल की सीमा से सटे इलाकों के मौसम पर भी नजर रखेगा। इससे अब स्थानीय मौसम की जानकारी के लिए पटना केंद्र पर निर्भरता कम होगी।
आम लोगों और किसानों को कैसे मिलेगी मदद
इस रडार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘नौकास्ट’ सुविधा देगा, जिससे किसी भी खतरे की चेतावनी 3 घंटे पहले मिल जाएगी। बिजली गिरने, अचानक आने वाले तूफान और तेज हवाओं की सटीक जानकारी अब ब्लॉक और पंचायत स्तर तक पहुंचाई जा सकेगी। मौसम विभाग के सहायक वैज्ञानिक राकेश कुमार ने बताया कि इससे समय पर चेतावनी मिलने से जान-माल का बचाव होगा और किसान अपनी खेती की योजना बेहतर तरीके से बना पाएंगे।
कब तक पूरा होगा इंस्टॉलेशन का काम
केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। वर्तमान अपडेट के अनुसार, इंस्टॉलेशन का काम तेजी से चल रहा है और मई 2026 के अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल के लिए उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बीच चर्चा हुई थी, जिसे पटना मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विवेक सिन्हा ने राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पूर्णिया डॉप्लर रडार का मुख्य काम क्या होगा
यह रडार भारी बारिश, आंधी, वज्रपात और तेज हवाओं की सटीक पूर्व चेतावनी देगा। यह 3 घंटे पहले ‘नौकास्ट’ चेतावनी जारी करने में सक्षम होगा जिससे पंचायत स्तर तक लोगों को अलर्ट किया जा सकेगा।
यह रडार किन-किन क्षेत्रों को कवर करेगा
इसकी रेंज 150 से 200 किलोमीटर होगी, जिसमें पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज समेत कोशी और सीमांचल के जिले शामिल हैं। यह नेपाल, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों की भी निगरानी करेगा।