Philippines में बिजली महंगी होने से बढ़ा सोलर पैनल का क्रेज, दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बना
World : फिलीपींस में बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों को सोलर एनर्जी की तरफ मोड़ दिया है। अब वहां के लोग अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं ताकि बिजली बिल कम किया जा सके और ग्रिड पर निर्भरता घटाई जा सके। यह देश
World : फिलीपींस में बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों को सोलर एनर्जी की तरफ मोड़ दिया है। अब वहां के लोग अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं ताकि बिजली बिल कम किया जा सके और ग्रिड पर निर्भरता घटाई जा सके। यह देश इस समय रिहायशी सोलर मार्केट के मामले में दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बिजली के दामों में भारी बढ़ोतरी और सोलर पैनल लगवाने के खर्च में कमी आने से लोग इसे ज्यादा अपना रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच वहां की छतों पर करीब 600 MW सोलर क्षमता जुड़ी है, जिससे कुल क्षमता अब 1,300 MW तक पहुंच गई है।
वहां बिजली की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस की रिहायशी बिजली सबसे महंगी हो गई है। मई 2026 तक रिहायशी ग्राहकों के लिए बिजली की दरें पिछले साल के मुकाबले 17% बढ़ गईं। इसी वजह से सोलर पैनल लगवाने के बाद पैसा वसूल होने का समय (Payback Period) भी कम हो गया है। पहले जहां घर के लिए सोलर लगवाने का खर्च 4 साल में वसूल होता था, अब वह घटकर 3.1 साल रह गया है।
| क्षेत्र | पुराना पेबैक समय (मई 2025) | नया पेबैक समय (मई 2026) |
|---|---|---|
| रिहायशी (Residential) | 4.0 साल | 3.1 साल |
| कमर्शियल (Commercial) | 3.0 साल | 2.3 साल |
| इंडस्ट्रियल (Industrial) | 3.9 साल | 3.1 साल |
सरकार ने भी इस काम को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। Department of Energy (DOE) अब ऐसे नियमों पर काम कर रहा है जिससे छोटे सोलर सिस्टम लगवाने के लिए सरकारी परमिट और क्लीयरेंस की जरूरत न पड़े। इसके अलावा नेट मीटरिंग की मंजूरी का समय घटाकर 10 दिन कर दिया गया है और क्षमता की सीमा को 100 kW से बढ़ाकर 1 MW कर दिया गया है।
सोलर पैनल की मांग इतनी बढ़ी है कि फिलीपींस अब दुनिया में सोलर पैनल पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है। मई 2026 तक वहां 407 मिलियन डॉलर के पैनल आयात हुए, जिनमें चीन का बड़ा हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल बिजली का 35% और 2040 तक 50% हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से आए।