Bihar : पटना के रामचक बैरिया में बनने वाले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का काम टेंडर प्रक्रिया में उलझने की वजह से अटक गया है। 514 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद शहर के कचरे को बिजली, बायोगैस और खाद में बदलना है
Bihar : पटना के रामचक बैरिया में बनने वाले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का काम टेंडर प्रक्रिया में उलझने की वजह से अटक गया है। 514 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद शहर के कचरे को बिजली, बायोगैस और खाद में बदलना है। इस प्लांट के शुरू होने से पटना समेत आसपास के 12 शहरों की गंदगी की समस्या दूर होगी, लेकिन पिछले 5 महीनों से टेंडर पूरा नहीं हो पाया है।
टेंडर प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है?
पटना नगर निगम (PMC) ने इस प्रोजेक्ट के लिए पहले टेंडर निकाला था, लेकिन उसमें सिर्फ एक ही कंपनी ने आवेदन किया था। सरकारी नियमों के मुताबिक, पारदर्शिता और बेहतर कॉम्पिटिशन के लिए ऐसी स्थिति में टेंडर रद्द करना पड़ता है। इसी वजह से PMC ने 16 अप्रैल 2026 को नए सिरे से बिड जारी किए हैं। अब इस नए टेंडर के आवेदन 7 मई 2026 तक लिए जाएंगे और 8 मई को इन्हें खोला जाएगा।
इस प्लांट से क्या फायदा होगा और क्या बनेगा?
यह प्लांट रामचक बैरिया लैंडफिल साइट पर बनेगा और रोजाना 1600 टन कचरे को प्रोसेस करेगा। यहाँ से 15 मेगावाट बिजली पैदा होगी और साथ ही बायोगैस और खाद बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट में 100 टन की बायो-मेथेनेशन यूनिट, 250 टन का मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) और 700 टन की कंपोस्टिंग फैसिलिटी शामिल होगी। इससे पटना, दानापुर, फतुहा, बिहटा और खगौल जैसे 12 इलाकों को राहत मिलेगी।
पुराने कचरे की सफाई और बजट का क्या अपडेट है?
नगर आयुक्त यहपाल मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मानसून से पहले 31 मई 2026 तक साइट पर जमा 20 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे को साफ किया जाए। इस प्रोजेक्ट को PPP मॉडल पर बनाया जा रहा है और केंद्र सरकार ने इसके लिए Viability Gap Funding के जरिए 33 प्रतिशत फंड जारी कर दिया है। टेंडर फाइनल होने के बाद करीब डेढ़ साल में काम पूरा होने की उम्मीद है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट कहाँ बनेगा और इसकी क्षमता क्या है?
यह प्लांट पटना के रामचक बैरिया साइट पर बनेगा। इसकी क्षमता रोजाना 1600 टन कचरा प्रोसेस करने की होगी, जिससे 15 MW बिजली और खाद बनाई जाएगी।
इस प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है और कौन मदद कर रहा है?
प्रोजेक्ट की कुल लागत 514.59 करोड़ रुपये है। इसे बिहार सरकार PPP मॉडल पर लागू कर रही है और केंद्र सरकार ने इसमें वित्तीय सहायता प्रदान की है।