Bihar: पटना में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और बढ़ती फीस से परेशान अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पटना के District Magistrate (DM) ने स्कूलों द्वारा एडमिशन, ट्यूशन और डेवलपमेंट के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने शुल्क को
Bihar: पटना में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और बढ़ती फीस से परेशान अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पटना के District Magistrate (DM) ने स्कूलों द्वारा एडमिशन, ट्यूशन और डेवलपमेंट के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने शुल्क को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि बच्चों के भविष्य और अभिभावकों की जेब के साथ खिलवाड़ करने वाले स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है ताकि अभिभावकों को किसी खास दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जा सके।
स्कूलों को किन नियमों का करना होगा पालन?
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने स्कूलों के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश तय किए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। नियमों के मुताबिक कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से हर साल भारी फीस नहीं बढ़ा सकता है।
- बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत स्कूल सालाना 7% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते हैं।
- नियमों के अनुसार हर दो साल में फीस में अधिकतम 15% की बढ़ोतरी ही की जा सकती है।
- स्कूलों को शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखनी होंगी।
- एडमिशन के समय बच्चों का कोई स्क्रीनिंग टेस्ट लेना पूरी तरह मना है।
- किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए स्कूल किसी एक दुकान को तय नहीं कर सकते हैं।
नियमों का उल्लंघन करने पर कितना लगेगा जुर्माना?
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर कोई स्कूल नियमों को तोड़ते हुए पाया जाता है तो उस पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और SDO को जांच के आदेश दिए गए हैं।
| उल्लंघन का प्रकार |
जुर्माने की राशि |
| RTE के तहत एडमिशन न लेना (पहली बार) |
25,000 रुपये |
| दूसरी बार वही गलती दोहराना |
50,000 रुपये |
| बिना मान्यता स्कूल चलाना |
1,00,000 रुपये तक |
| नियमों के खिलाफ स्कूल चालू रखना |
10,000 रुपये प्रतिदिन |
अभिभावक अब स्कूलों की मनमानी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार फीस को कंट्रोल करने के लिए एक रेगुलेटरी कमेटी बनाने पर भी विचार कर रही है जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और आम आदमी पर पढ़ाई का बोझ न बढ़े।