UP : नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को हुए मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार लोग अब जेल में हैं। इन मजदूरों के परिवार अब उन्हें बाहर निकालने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन गरीबी उनके आड़े आ रही है। जमानत के लिए
UP : नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को हुए मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार लोग अब जेल में हैं। इन मजदूरों के परिवार अब उन्हें बाहर निकालने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन गरीबी उनके आड़े आ रही है। जमानत के लिए वकील की फीस और कोर्ट की प्रक्रिया के लिए परिवारों को 20,000 रुपये जुटाने पड़ रहे हैं, जो उनके लिए बहुत बड़ी रकम है।
जमानत और कानूनी प्रक्रिया में क्या दिक्कतें आ रही हैं?
गिरफ्तार मजदूरों के परिजन, जैसे आनंद कुमार राम की पत्नी मुन्नी देवी, जमानत के लिए पैसे इकट्ठा करने की कोशिश कर रही हैं। पिछले कुछ मामलों में देखा गया है कि नोएडा में किसानों को 20,000 रुपये की जमानत राशि पर रिहा किया गया था। अब मजदूरों के परिवार भी इसी उम्मीद में हैं कि पैसे जमा करके वे अपने परिजनों को छुड़ा पाएंगे। सुनील नाम के एक गिरफ्तार मजदूर के भाई ने अपने पिता से जमानत के लिए 20,000 रुपये भेजने को कहा है।
पुलिस और वकीलों के बीच क्या आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं?
पुलिस और वकीलों के बीच गिरफ्तारी के तरीके को लेकर विवाद है। वकील सुपंथा सिन्हा और माणिक गुप्ता का कहना है कि पुलिस ने कई लोगों को बिना FIR की कॉपी दिए और बिना गिरफ्तारी का कारण बताए हिरासत में लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आदित्य आनंद को RPF ने गिरफ्तार किया, जबकि RPF के पास BNS के तहत गिरफ्तारी का अधिकार नहीं है। दूसरी तरफ, नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का कहना है कि आदित्य आनंद इस हिंसा का मास्टरमाइंड था और वह व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को भड़का रहा था।
सरकार का क्या कहना है और क्या बदलाव हुए?
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हिंसा को एक सोची-समझी साजिश बताया है। सरकार के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से 45 बाहरी तत्व थे जो मजदूरों के भेष में आए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस पूरे विवाद के बाद सरकार ने नोएडा और गाजियाबाद के मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन में 21% की बढ़ोतरी मंजूर कर ली है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी।
| मुख्य आरोपी/व्यक्ति |
भूमिका/स्थिति |
आरोप/विवरण |
| आदित्य आनंद |
कथित मास्टरमाइंड |
हिंसा की साजिश रचना और भड़काना |
| आनंद कुमार राम |
गिरफ्तार मजदूर |
हत्या का प्रयास और दंगा करना |
| हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा |
मजदूर बिगुल दस्ता सदस्य |
हिंसा के दौरान मौजूद रहना |
| लक्ष्मी सिंह |
पुलिस कमिश्नर |
जांच और गिरफ्तारी का नेतृत्व |