UP : नोएडा के औद्योगिक इलाकों में पिछले कुछ दिनों से फैक्ट्री मजदूरों में भारी नाराजगी देखी गई। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन कई जगहों पर हिंसा में बदल गया, जिसमें पत्थरबाजी और आगजनी की खबरें आईं
UP : नोएडा के औद्योगिक इलाकों में पिछले कुछ दिनों से फैक्ट्री मजदूरों में भारी नाराजगी देखी गई। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन कई जगहों पर हिंसा में बदल गया, जिसमें पत्थरबाजी और आगजनी की खबरें आईं। हालांकि, यूपी सरकार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का ऐलान किया, लेकिन मजदूरों का कहना है कि महंगाई के सामने यह बढ़ी हुई रकम बहुत कम है।
न्यूनतम वेतन में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के लिए सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए रेट तय किए हैं। जिला मजिस्ट्रेट Medha Roopam ने बताया कि एक हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिश पर मुख्यमंत्री ने इस बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नए वेतन की लिस्ट नीचे दी गई है:
| श्रेणी (Category) |
पुराना वेतन (₹) |
नया वेतन (₹) |
| अकुशल (Unskilled) |
11,313 |
13,690 |
| अर्ध-कुशल (Semi-skilled) |
12,445 |
15,059 |
| कुशल (Skilled) |
13,940 |
16,868 |
हिंसा के पीछे कौन था और पुलिस की क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस कमिश्नर Laxmi Singh के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अब तक 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 7 FIR दर्ज हुई हैं। जांच में पता चला है कि पकड़े गए 66 लोगों में से 45 लोग फैक्ट्री मजदूर नहीं थे, बल्कि बाहर से आए थे। प्रशासन ने इसमें ‘मजदूर बिगुल’ और कुछ बाहरी नेटवर्क के शामिल होने का शक जताया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अफवाह फैलाने वालों और बाहरी उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सिर्फ सैलरी ही नहीं, और क्या हैं मजदूरों की मांगें?
मजदूरों का कहना है कि एनसीआर (NCR) में रहने का खर्च बहुत बढ़ गया है, इसलिए यह मामूली बढ़ोतरी काफी नहीं है। साथ ही हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों की तुलना में नोएडा में वेतन कम होने से भी नाराजगी है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- ओवरटाइम और छुट्टी के दिन काम करने पर डबल पैसा मिले।
- सैलरी समय पर मिले और सालाना बोनस दिया जाए।
- कॉन्ट्रैक्ट लेबर के लिए बेहतर शर्तें और लिखित एग्रीमेंट हो।
- सोशल सिक्योरिटी और साप्ताहिक छुट्टी सुनिश्चित की जाए।
सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर चल रही 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबर गलत है। भविष्य के लिए एक वेज बोर्ड बनाने की योजना है ताकि सभी पक्षों से बात करके एक स्थायी सिस्टम तैयार किया जा सके।