Delhi में NITI Aayog की बड़ी बैठक, SHANTI Act 2025 से देश में बढ़ेगी न्यूक्लियर पावर, प्राइवेट कंपनियों को मिलेगा मौका

Delhi: देश में परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। NITI Aayog ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक खास बैठक की। इस बैठक का मकसद SHANTI

Delhi: देश में परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। NITI Aayog ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक खास बैठक की। इस बैठक का मकसद SHANTI Act 2025 को जमीन पर लागू करने के तरीके तय करना था, ताकि भारत अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ा सके और जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर सके।

इस पूरी प्रक्रिया की अध्यक्षता NITI Aayog के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने की। बैठक में बिजली मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, CEA के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद और NTPC के CMD गुरदीप सिंह समेत कई बड़े अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि कैसे इस नए कानून के जरिए विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित किया जाए और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाई जाए।

SHANTI Act 2025 के तहत अब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में केवल सरकारी एकाधिकार नहीं रहेगा, बल्कि यह एक कमर्शियल पार्टनरशिप मॉडल की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि अब लाइसेंस मिलने पर भारतीय और विदेशी प्राइवेट कंपनियां परमाणु बिजली संयंत्रों के निर्माण, मालिकाना हक और उनके संचालन में हिस्सा ले सकेंगी। इसके साथ ही, Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को अब एक स्वतंत्र रेगुलेटर के रूप में मान्यता दी गई है, जो सीधे संसद के प्रति जवाबदेह होगा।

कानून में लायबिलिटी यानी नुकसान की भरपाई के लिए एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसे नीचे टेबल में समझा जा सकता है:

रिएक्टर का प्रकार/सुविधा अधिकतम लायबिलिटी सीमा
3,600 मेगावाट से बड़े रिएक्टर 30 अरब रुपये (INR 30 Billion)
छोटे रिएक्टर और फ्यूल साइकिल सुविधाएं न्यूनतम 1 अरब रुपये (INR 1 Billion)
परमाणु सामग्री का परिवहन न्यूनतम 1 अरब रुपये (INR 1 Billion)

बैठक के दौरान तीन मुख्य बातों पर जोर दिया गया। पहली यह कि नियमों को ऐसा बनाया जाए कि विदेशी पैसा आसानी से आए लेकिन देश के हित सुरक्षित रहें। दूसरी बात प्रोजेक्ट्स के लिए इंश्योरेंस और रिस्क मैनेजमेंट की व्यवस्था करना था ताकि आम जनता में परमाणु ऊर्जा को लेकर भरोसा बढ़े। तीसरी बात घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और इस क्षेत्र के लिए कुशल वर्कफोर्स तैयार करना था।