Delhi: यमुना के किनारे अवैध डेयरी चलाने वालों पर NGT सख्त, MCD और DPCC से मांगी नई रिपोर्ट
Delhi: यमुना नदी के डूब क्षेत्र (floodplain) में चल रही अवैध डेयरी गतिविधियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि यमुना के किनारे से अवैध डेयरी हटाने के पुराने आदेशों का पूरी
Delhi: यमुना नदी के डूब क्षेत्र (floodplain) में चल रही अवैध डेयरी गतिविधियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि यमुना के किनारे से अवैध डेयरी हटाने के पुराने आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। इस लापरवाही के बाद NGT ने अब MCD और DPCC से ताजा रिपोर्ट मांगी है।
चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच ने हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान पाया कि वहां अब भी अस्थाई पशु शेड और जानवर मौजूद हैं। इस स्थिति को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने Municipal Corporation of Delhi (MCD) को छह हफ्ते के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने को कहा है। साथ ही, Delhi Pollution Control Committee (DPCC) को दोबारा जांच कर नई रिपोर्ट फाइल करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पूरा मामला अप्रैल 2024 के एक पुराने आदेश से जुड़ा है, जिसमें Delhi Development Authority (DDA) और DPCC को अवैध डेयरी खत्म करने के लिए कहा गया था। जुलाई 2025 में DPCC ने दावा किया था कि इलाके में कोई डेयरी नहीं चल रही है, लेकिन पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने फोटो सबूत पेश कर इस दावे को गलत साबित कर दिया।
जून और जुलाई 2026 की नई जांच रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि मयूर विहार फेज-1 के पास O-Zone, DND फ्लाईवे के नीचे और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के आसपास के इलाकों में अभी भी 50-60 जानवर, चारा और गोबर के ढेर मौजूद हैं। हालांकि वहां कोई पक्का निर्माण नहीं मिला, लेकिन अस्थाई शेड अभी भी चल रहे हैं।
नियमों के मुताबिक, यमुना के इको-सेंसिटिव इलाके में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि या निर्माण की अनुमति नहीं है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की 2021 की गाइडलाइन्स के अनुसार, डेयरी फार्म चलाने के लिए floodplain से दूर जगह चुनना और CTE व CTO जैसे जरूरी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। अब NGT ने इस मामले की अगली सुनवाई तय की है और DDA से इन अवैध कब्जों को हटाने की मांग की गई है।