Delhi: यमुना के डूब क्षेत्र की सीमा तय करने में देरी पर NGT सख्त, पर्यावरण सचिव को एक हफ्ते में बैठक बुलाने का आदेश
Delhi: यमुना नदी के फ्लडप्लेन यानी डूब क्षेत्र की फिजिकल मार्किंग को लेकर चल रहा विवाद अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की निगरानी में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे एक हफ्ते के भ
Delhi: यमुना नदी के फ्लडप्लेन यानी डूब क्षेत्र की फिजिकल मार्किंग को लेकर चल रहा विवाद अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की निगरानी में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे एक हफ्ते के भीतर DDA और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) के अधिकारियों के साथ बैठक करें। इस बैठक का मकसद उस गतिरोध को खत्म करना है जिसकी वजह से यमुना के डूब क्षेत्र की सीमाएं अब तक तय नहीं हो पाई हैं।
NGT की बेंच, जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे, ने इस मामले में अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने पाया कि यमुना के किनारों पर अवैध डेयरी फार्मों को हटाने के पुराने आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। अधिकारियों ने तर्क दिया कि जब तक 1:100 साल के बाढ़ स्तर वाला नक्शा फाइनल नहीं हो जाता, तब तक जमीन की मार्किंग शुरू करना मुश्किल है। इसके लिए पुणे के CWPRS संस्थान को स्टडी सौंपी गई है, जिसकी समयसीमा दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई है।
हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों ने वजीराबाद से पल्ला तक 22 किलोमीटर के इलाके की मार्किंग अगस्त 2026 तक पूरी करने का समय मांगा था, जिसे NGT ने बहुत ज्यादा और अव्यावहारिक बताया। पूर्व सचिव शशि शेखर ने इस देरी के पीछे नौकरशाही की नीयत और लैंड माफिया के प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया है। दिल्ली सरकार ने पहले दावा किया था कि वजीराबाद से जैतपुर तक की मार्किंग पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी जांच में बड़ी कमियां मिलीं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि DDA और राजस्व विभाग के पास सही नक्शे नहीं हैं और कुछ पुराने नक्शे फटे हुए हैं।
इस पूरे मामले में अब नए नियम लागू होंगे। मार्किंग अब 100 साल के बाढ़ स्तर के आधार पर होगी, जिससे पहले के मुकाबले ज्यादा इलाका डूब क्षेत्र में आएगा। साथ ही, अवैध डेयरी चलाने वालों पर CPCB के 2021 के नियमों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। MCD को निर्देश दिया गया है कि वह अवैध कब्जों और डेरियों के खिलाफ कार्रवाई करे और इसकी रिपोर्ट छह हफ्ते में पेश करे। वहीं, दिल्ली के एलजी यमुना के विकास के लिए हाउस बोट और क्लब कन्वेंशन सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।