NEET पेपर लीक: लखनऊ और प्रयागराज में Gen-Z छात्रों का प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
UP/Lucknow: नीट पेपर लीक के मामले में लखनऊ और प्रयागराज के युवाओं ने जिस तरह से मोर्चा संभाला, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। Gen-Z छात्रों के इस जज्बे और विरोध प्रदर्शन का असर इतना बड़ा रहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत
UP/Lucknow: नीट पेपर लीक के मामले में लखनऊ और प्रयागराज के युवाओं ने जिस तरह से मोर्चा संभाला, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। Gen-Z छात्रों के इस जज्बे और विरोध प्रदर्शन का असर इतना बड़ा रहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से लेकर परिवर्तन चौक और इको गार्डन तक छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे छात्र नेता हिमांशु बाजपेयी ने बताया कि इस आंदोलन में युवाओं ने अपनी रचनात्मकता और जुनून दिखाया। इस विरोध प्रदर्शन में लड़कियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही और माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण बना रहा। इस पूरे आंदोलन को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के एक व्यंग्यात्मक समूह ने आगे बढ़ाया, जिसे 20 जुलाई को दिल्ली में हुए ‘संसद चलो’ मार्च के बाद और ज्यादा मजबूती मिली।
दूसरी तरफ, प्रयागराज में भी प्रदर्शन हुए जहां 25 जुलाई को कुछ निजी गाड़ियों में तोड़फोड़ की खबरें आईं। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पकड़े गए लोग छात्र नहीं हैं, बल्कि उनमें कुछ दुकानदार, होटल क्लीनर और एक हिस्ट्रीशीटर शामिल है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गिरफ्तारियों की आलोचना की।
कानूनी मोर्चे पर दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सोमवार को पहली सुनवाई हुई, लेकिन CBI वकील के न होने की वजह से इसे 3 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया। स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलीगा ने अब पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी पुलिस की कथित सख्ती और परीक्षा की गड़बड़ियों को लेकर याचिकाएं सुनी जानी थीं।
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक सभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026’ पेश किया है। इस नए कानून के तहत पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही, परीक्षा सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई है। IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी ने सुझाव दिया है कि अब पेपर लीक का खतरा वितरण के बजाय पेपर सेट करने वालों से ज्यादा है, इसलिए उनकी कड़ी जांच और AI निगरानी की जरूरत है।