NEET पेपर लीक मामला: 5 लाख रुपये लेने वाले डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज, 13 आरोपी अब 6 अगस्त तक जेल में

Delhi: नीट यूजी पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक डॉक्टर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोपी डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे पर आरोप है कि उन्होंने केमिस्ट्री के पेपर तक पहुंच दिलाने के बदले एक उम्

Delhi: नीट यूजी पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक डॉक्टर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोपी डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे पर आरोप है कि उन्होंने केमिस्ट्री के पेपर तक पहुंच दिलाने के बदले एक उम्मीदवार के परिवार से 5 लाख रुपये लिए थे। कोर्ट ने डॉक्टर समेत कुल 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 6 अगस्त तक बढ़ा दिया है।

सीबीआई ने कोर्ट में जमानत का कड़ा विरोध किया। जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला अभी बहुत गंभीर मोड़ पर है और डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड्स और पैसों के लेन-देन की जांच चल रही है। सीबीआई के मुताबिक, नीट पेपर लीक जैसा अपराध पूरे देश की छवि खराब करता है और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आरोपी डॉक्टर शिरुरे, जो महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं, उन्होंने कथित तौर पर दो अन्य डॉक्टरों को मुख्य साजिशकर्ता से मिलवाया था।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक की इन गलतियों को पूरी तरह रोकना होगा और इसके लिए केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले सुधार करने होंगे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

वहीं, इसी मामले में लातूर के एक कोचिंग संस्थान के मालिक ने दिल्ली की अदालत में अपनी जमानत याचिका वापस ले ली है। इसके अलावा, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें नीट विरोध प्रदर्शनों की एनआईए (NIA) जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि जांच को एनआईए को सौंपने का फैसला केवल केंद्र सरकार ही ले सकती है।

बता दें कि पेपर लीक के आरोपों के बाद सरकार और एनटीए (NTA) ने 3 मई को हुई नीट यूजी 2026 की परीक्षा को रद्द कर दिया था। अब सरकार राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर एनटीए के कामकाज में सुधार कर रही है।