Maharashtra: नवी मुंबई के खारघर इलाके में एक स्कूल द्वारा फीस में 25% की बढ़ोतरी किए जाने पर अभिभावकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के बाद स्कूल मैनेजमेंट ने बढ़ोतरी को घटाकर 19% कर दिया है, लेकिन पेरेंट्स अभी भी
Maharashtra: नवी मुंबई के खारघर इलाके में एक स्कूल द्वारा फीस में 25% की बढ़ोतरी किए जाने पर अभिभावकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के बाद स्कूल मैनेजमेंट ने बढ़ोतरी को घटाकर 19% कर दिया है, लेकिन पेरेंट्स अभी भी इसे 15% तक सीमित करने की मांग कर रहे हैं। करीब 4,600 छात्रों वाले इस स्कूल में विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।
फीस बढ़ोतरी को लेकर क्या हैं नियम और विवाद
महाराष्ट्र एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2011 के मुताबिक, अगर स्कूल ने कोई लॉन्ग टर्म फीस स्ट्रक्चर घोषित नहीं किया है, तो वह पिछले साल की तुलना में अधिकतम 15% तक फीस बढ़ा सकता है। नियम यह भी है कि 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी के लिए कम से कम 76% अभिभावकों की सहमति जरूरी है। खारघर स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि घटाई गई फीस अब नियमों के दायरे में है और इसे एजुकेशन ऑफिसर ने भी जांचा है।
सरकार ने फीस कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाए हैं
अभिभावकों की शिकायतों को सुनने और फीस पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- रिवीजन कमेटी का गठन: सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस एम.जी. गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक रिवीजन कमेटी बनाई है, जो फीस विवादों में अंतिम फैसला लेगी।
- क्षेत्रीय कमेटियां (DFRC): मुंबई सहित चार क्षेत्रों में रिटायर्ड जजों की अगुवाई में डिविजनल फीस रेगुलेटरी कमेटियां बनाई गई हैं। मुंबई क्षेत्र की कमान रिटायर्ड जज एम.एस. गुप्ता को सौंपी गई है।
- शिकायत का तरीका: अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो पेरेंट्स डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन के ऑफिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
विवाद सुलझाने के लिए क्या प्रावधान हैं
नियमों के अनुसार, जब तक अधिकारियों का अंतिम फैसला नहीं आता, स्कूल या तो पिछले साल की फीस में 15% जोड़कर ले सकते हैं या फिर प्रस्तावित नई फीस, जो भी कम हो। इसके अलावा, स्कूलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे फीस बढ़ाने का प्रस्ताव कम से कम छह महीने पहले पैरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) के सामने रखें। इंडिया वाइड पेरेंट्स एसोसिएशन की अनुभा सहाय ने मांग की है कि शिकायत दर्ज करने के लिए 25% पेरेंट्स की सहमति की शर्त को हटाया जाए ताकि व्यक्तिगत तौर पर भी शिकायत की जा सके।