Maharashtra: नवी मुंबई के उलवे इलाके में सड़क के डिवाइडर पर मोबाइल टावर लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के शहरी विकास विभाग (UDD) को शिकायतों की बा
Maharashtra: नवी मुंबई के उलवे इलाके में सड़क के डिवाइडर पर मोबाइल टावर लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के शहरी विकास विभाग (UDD) को शिकायतों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम स्थानीय निवासियों और नागरिक समूहों के भारी विरोध के बाद उठाया गया है।
क्यों हो रहा है मोबाइल टावर का विरोध
उलवे के निवासियों और नागरिक समूहों ने 13 अप्रैल 2026 को इस प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। लोगों का कहना है कि सड़क के बीचों-बीच टावर लगाने से ट्रैफिक में दिक्कत आएगी और यह सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है। इसके अलावा, लोग रेडिएशन से होने वाले स्वास्थ्य खतरों को लेकर भी डरे हुए हैं। स्थानीय नेता संतोष काटे ने बताया कि लोग बेहतर नेटवर्क तो चाहते हैं, लेकिन बिना सुरक्षा इंतजामों के डिवाइडर पर टावर लगाना गलत है।
जांच के लिए किसे सौंपी गई जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. केएच गोविंदा राज को निर्देश दिए हैं। डॉ. राज शहरी विकास विभाग-II के प्रभारी हैं, जो महाराष्ट्र के गैर-मेट्रो नागरिक निकायों और नगर परिषदों की देखरेख करते हैं। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता बीएन कुमार ने मुख्यमंत्री और रायगढ़ जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप की अपील की थी, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया है।
जनता की मुख्य मांगें और चिंताएं
- टावरों के लिए लिए गए स्वास्थ्य, पर्यावरण और ट्रैफिक सुरक्षा क्लीयरेंस की स्वतंत्र समीक्षा की जाए।
- रेडिएशन के लंबे समय तक शरीर पर होने वाले असर की वैज्ञानिक स्टडी कराई जाए।
- सरकारी डेटा, रेडिएशन ऑडिट और कंप्लायंस सर्टिफिकेट को सार्वजनिक किया जाए।
- दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव में जून 2025 में गिरे 100 फुट ऊंचे टावर जैसी घटना दोबारा न हो, इसकी गारंटी मिले।
फिलहाल नागरिक समूह RTI के जरिए इस प्रोजेक्ट की परमिशन और स्ट्रक्चरल अप्रूवल की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।