MP और Gujarat के बीच नागदा-गोधरा रेलखंड पर कवच सिस्टम शुरू, अब दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेनें चलेंगी और तेज
MP/Gujarat: दिल्ली-मुंबई रेल रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर है। नागदा से गोधरा के बीच पूरे 302 किलोमीटर के रेलखंड पर स्वदेशी कवच सिस्टम पूरी तरह चालू हो गया है। इस कदम से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और सफ
MP/Gujarat: दिल्ली-मुंबई रेल रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर है। नागदा से गोधरा के बीच पूरे 302 किलोमीटर के रेलखंड पर स्वदेशी कवच सिस्टम पूरी तरह चालू हो गया है। इस कदम से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा।
यह सिस्टम खासतौर पर उन इलाकों के लिए मददगार है जहाँ भीड़ ज्यादा होती है। रेलवे के मुताबिक, कवच एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर ट्रेन का ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देगा। इससे आमने-सामने की टक्कर और सिग्नल पार करने जैसी गंभीर दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। कोहरे जैसे खराब मौसम में भी यह सिस्टम ट्रेनों को सुरक्षित चलाने में मदद करेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जिस काम को विकसित देशों ने करने में 20-30 साल लगाए, भारत उसे 6-7 साल में पूरा करने की दिशा में बढ़ रहा है। वेस्टर्न रेलवे के जीएम प्रदीप कुमार और रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने भी इस सिस्टम के पूरी तरह लागू होने की पुष्टि की है। कवच का नया वर्जन 4.0 अब और भी सटीक है, जिससे स्टेशनों और बड़े यार्डों में ट्रेनों की लोकेशन की सही जानकारी मिलेगी।
कवच सिस्टम और प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
| विवरण | जानकारी | |
|---|---|---|
| कुल दूरी (नागदा-गोधरा) | 302 किलोमीटर | |
| सुरक्षा सर्टिफिकेट | SIL-4 (दुनिया का सबसे ऊंचा स्तर) | |
| कुल खर्च (जून 2026 तक) | 3,874.9 करोड़ रुपये | |
| बजट (FY 2026-27) | 2,066.24 करोड़ रुपये | |
| ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर लागत | करीब 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर | |
| इंजन फिटिंग लागत | करीब 80 लाख रुपये प्रति इंजन |
इस प्रोजेक्ट के तहत रतलाम डिवीजन के पंचपिप्ल्या-मंगल महुडी सेक्शन के बाकी बचे 78 किलोमीटर के हिस्से की टेस्टिंग 20 जुलाई 2026 को पूरी की गई थी, जिसके बाद 27-28 जुलाई 2026 तक पूरा सेक्शन चालू हो गया। अब तक दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे बड़े रूटों पर करीब 2,490 किलोमीटर तक कवच वर्जन 4.0 लगाया जा चुका है।