Maharashtra: मुंबई की एक 58 साल की महिला साइबर ठगों का शिकार हो गई और उसने 60 लाख रुपये गंवा दिए। जालसाजों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला को डराया और उसे अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर किया। यह पूरी घटना ‘डिजिट
Maharashtra: मुंबई की एक 58 साल की महिला साइबर ठगों का शिकार हो गई और उसने 60 लाख रुपये गंवा दिए। जालसाजों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला को डराया और उसे अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर किया। यह पूरी घटना ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की गई ठगी का मामला है।
ठगी कैसे हुई और कितने पैसे गंवाए
ठगों ने पहले वीडियो कॉल के जरिए खुद को Delhi Police का अधिकारी बताया। इसके बाद कॉल को मुंबई के एक फर्जी DCP के पास ट्रांसफर कर दिया गया। महिला को बताया गया कि वह एक ‘डिजिटल जांच’ के दायरे में है और उसके दिवंगत पति के कुछ लोन बकाया हैं। इस डर से महिला ने अपनी संपत्ति बेची और ठगों को कैश दिया।
- 6 फरवरी को पहली बार 25 लाख रुपये दिए गए।
- एक अन्य बार 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
- कुल ठगी की राशि 60 लाख रुपये रही।
डिजिटल अरेस्ट क्या है और सरकार ने क्या कहा है
सरकार और पुलिस ने साफ किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी कॉल पर भरोसा न करें।
शिकायत कहां करें और बचाव के तरीके
मुंबई पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने सलाह दी है कि अगर कोई आपको फोन पर डराता है या पैसे मांगता है, तो तुरंत इसकी सूचना दें।
| मदद के लिए साधन |
विवरण |
| नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन |
1930 |
| पुलिस स्टेशन |
नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन |