Mumbai में पानी की भारी किल्लत, झीलों का लेवल गिरा तो अब जमीन के पानी और टैंकरों के भरोसे शहर
Maharashtra: मुंबई में मानसून की देरी और झीलों में पानी कम होने से जल संकट गहरा गया है। शहर की सात मुख्य झीलों में पानी का स्तर गिरकर कुल क्षमता के केवल 10-12% रह गया है। इस वजह से अब लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए बोरवेल
Maharashtra: मुंबई में मानसून की देरी और झीलों में पानी कम होने से जल संकट गहरा गया है। शहर की सात मुख्य झीलों में पानी का स्तर गिरकर कुल क्षमता के केवल 10-12% रह गया है। इस वजह से अब लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए बोरवेल और प्राइवेट वाटर टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे जमीन के नीचे का पानी तेजी से खत्म हो रहा है।
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मुंबई में मानसून 11 जून की सामान्य तारीख तक नहीं आया। 4 से 15 जून के बीच देश में 64% बारिश की कमी दर्ज की गई। IMD ने 15 और 16 जून के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें उमस भरी गर्मी और हल्की बारिश की संभावना है। उम्मीद है कि 20 जून के बाद ही शहर में अच्छी बारिश होगी।
हालात को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने सभी जिला प्रशासनों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 अगस्त 2026 तक पीने के पानी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे। सरकार ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ने पर रोक लगा दी है और अवैध तरीके से पानी निकालने वालों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं, BMC ने 15 मई से लागू 10% पानी की कटौती को जारी रखा है।
संकट से निपटने के लिए मुंबई नगर निगम कमिश्नर अश्विनी भिडे ने नगर निगम की जमीन पर मौजूद 350 पुराने खुले कुओं को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। साथ ही, BMC मीठी नदी के ऊपरी इलाके में एक्विफर मैपिंग का पायलट प्रोजेक्ट भी चला रही है ताकि भविष्य में जमीन के पानी का सही इस्तेमाल हो सके।
दूसरी तरफ, जमीन से पानी निकालने के नियमों को लेकर विवाद बढ़ गया है। Central Ground Water Authority (CGWA) के 2020 के नियमों के मुताबिक, कमर्शियल इस्तेमाल के लिए NOC लेना जरूरी है, जिसके लिए 200 वर्ग मीटर जमीन और डिजिटल फ्लो मीटर जैसी शर्तें हैं। ग्राउंडवाटर एक्टिविस्ट सुरेश कुमार ढोका ने बताया कि शहर में कमर्शियल बिक्री के लिए 17,364 से ज्यादा कुएं हैं, लेकिन मई 2025 तक सिर्फ 619 के पास ही NOC था।
मुंबई वाटर टैंकर एसोसिएशन (MWTA) के प्रवक्ता अंकुर शर्मा का कहना है कि वे रोजाना करीब 550 मिलियन लीटर पानी सप्लाई करते हैं। उनका तर्क है कि मुंबई की बुनियादी बनावट को देखते हुए CGWA के नियम अव्यावहारिक हैं। शिव सेना UBT नेता आदित्य ठाकरे ने भी केंद्र सरकार से इन नियमों में बदलाव की मांग की है ताकि घनी आबादी वाले शहरों में पानी की किल्लत न हो।