Maharashtra: मुंबई के लोग इन दिनों भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं। शहर को पानी देने वाली सात झीलों का जलस्तर काफी नीचे गिर गया है, जिससे आने वाले दिनों में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। मानसून की देरी और बारिश की कमी ने म
Maharashtra: मुंबई के लोग इन दिनों भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं। शहर को पानी देने वाली सात झीलों का जलस्तर काफी नीचे गिर गया है, जिससे आने वाले दिनों में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। मानसून की देरी और बारिश की कमी ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, जिससे आम जनता की दैनिक जरूरतों पर असर पड़ रहा है।
झीलों की हालत और पानी की कमी का क्या है स्टेटस?
मुंबई की सात मुख्य झीलों में पानी का स्टॉक अब कुल क्षमता के केवल 12.12% से 12.49% तक रह गया है। कुल 14,47,363 मिलियन लीटर की क्षमता वाली इन झीलों में अब सिर्फ 1,80,756 मिलियन लीटर पानी बचा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि Upper Vaitarna झील का इस्तेमाल करने लायक पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब यह केवल रिजर्व स्टॉक के भरोसे है।
मानसून में देरी और मौसम का मिजाज क्या रहेगा?
मुंबई में southwest monsoon की सामान्य शुरुआत 11 जून को होनी थी, लेकिन यह समय पर नहीं आया। IMD के मुताबिक, दक्षिण कोंकण क्षेत्र में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिससे अगले 5-6 दिनों तक मुंबई में बारिश शुरू होने की उम्मीद कम है। पूर्व IMD वैज्ञानिक K.S. Hosalikar ने चेतावनी दी है कि El Niño के प्रभाव के कारण इस साल बारिश कम हो सकती है, जिससे शहर के लिए मुश्किल समय आ सकता है।
BMC और प्रशासन ने पानी बचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
BMC ने 15 मई से लागू किए गए 10% पानी की कटौती के आदेश को जारी रखा है। कमिश्नर अश्विनी भिडे ने नगर निगम की जमीन पर मौजूद 350 पुराने खुले कुओं को फिर से चालू करने का निर्देश दिया है। इस कुओं के पानी का इस्तेमाल कपड़े धोने और बागवानी जैसे कामों के लिए किया जाएगा, इसे पीने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वहीं, वाटर टैंकर एसोसिएशन की हड़ताल और ठाणे में पाइपलाइन के काम की वजह से पानी की सप्लाई में और दिक्कतें आई हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई की झीलों में अभी कितना पानी बचा है?
मुंबई की सात झीलों में कुल क्षमता का लगभग 12.12% से 12.49% पानी बचा है, जो करीब 1,80,756 मिलियन लीटर है।
मुंबई में मानसून की देरी का मुख्य कारण क्या है?
IMD के अनुसार, दक्षिण कोंकण में कमजोर हवाओं और El Niño की स्थितियों के कारण मानसून की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे बारिश में देरी हो रही है।