Maharashtra: मुंबई के लोगों के लिए रात की नींद अब और मुश्किल होने वाली है। Council on Energy, Environment and Water (CEEW) ने IMD के डेटा का विश्लेषण किया है, जिसमें सामने आया कि मुंबई में दिन के मुकाबले रातें ज्यादा तेज
Maharashtra: मुंबई के लोगों के लिए रात की नींद अब और मुश्किल होने वाली है। Council on Energy, Environment and Water (CEEW) ने IMD के डेटा का विश्लेषण किया है, जिसमें सामने आया कि मुंबई में दिन के मुकाबले रातें ज्यादा तेजी से गर्म हो रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते शहरीकरण की वजह से शहर का तापमान बढ़ रहा है, जिससे आम जनता की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
मुंबई में रात का तापमान क्यों बढ़ रहा है
CEEW के मुताबिक, मुंबई में ‘अनयूजुअली वार्म नाइट्स’ यानी असामान्य रूप से गर्म रातों की संख्या बढ़ गई है। साल 1981-2010 के बीच साल में औसतन 12 रातें ऐसी होती थीं, लेकिन 2011-2024 के बीच यह बढ़कर 26 रातें हो गई हैं। इसका बड़ा कारण ‘अर्बन हीट आइलैंड’ इफेक्ट है। शहर में इस्तेमाल होने वाला कंक्रीट और डामर दिनभर गर्मी सोख लेते हैं और रात में उसे छोड़ते हैं, जिससे रातें ठंडी नहीं हो पातीं।
सेहत और काम पर क्या पड़ेगा असर
रात में गर्मी बढ़ने से शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिलता, जिससे नींद खराब होती है। यह समस्या उन लोगों के लिए ज्यादा गंभीर है जो बाहर कड़ी मेहनत का काम करते हैं। मुंबई जैसे तटीय शहर में नमी (humidity) ज्यादा होती है, जिससे पसीना नहीं सूखता और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। इससे हीट स्ट्रोक, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
आगे क्या होने वाला है
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग इसी तरह बढ़ती रही, तो 2031-2050 के बीच गर्म रातों की संख्या बढ़कर साल में 48-49 तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि शहर में पेड़-पौधे बढ़ाए जाएं और जल निकायों का संरक्षण किया जाए। साथ ही, हीट एक्शन प्लान में रात की गर्मी और उमस को भी शामिल करने की जरूरत है ताकि मजदूरों और आम लोगों को बचाया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में गर्म रातों की संख्या में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
CEEW के डेटा के अनुसार, 1981-2010 के दौरान साल में औसतन 12 असामान्य रूप से गर्म रातें होती थीं, जो 2011-2024 के बीच बढ़कर 26 रातें हो गई हैं।
रात की गर्मी से सेहत को क्या खतरा है?
रात में तापमान ज्यादा होने से नींद बाधित होती है और शरीर रिकवर नहीं कर पाता। इससे हीट एग्जॉशन, हीटस्ट्रोक और डायबिटीज व हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।