Mumbai University के सहायता प्राप्त कॉलेजों में आर्ट्स पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 55% घटी, कई कॉलेजों पर लगा जुर्माना

Maharashtra: मुंबई यूनिवर्सिटी (MU) से जुड़े सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में पिछले 15 सालों में आर्ट्स विषय चुनने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक आर्ट्स एनरोलमेंट में 55% की कमी दर्ज की

Maharashtra: मुंबई यूनिवर्सिटी (MU) से जुड़े सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में पिछले 15 सालों में आर्ट्स विषय चुनने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक आर्ट्स एनरोलमेंट में 55% की कमी दर्ज की गई है, जिसे शिक्षा विशेषज्ञ समय के साथ बदलाव न ला पाने की विफलता मान रहे हैं। अब युवा छात्र पारंपरिक डिग्री के बजाय ऐसे कोर्स चुन रहे हैं जिनसे उन्हें नौकरी मिलने की संभावना ज्यादा हो।

यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में आर्ट्स कोर्स के पहले साल के दाखिलों में 54% की गिरावट आई है, जो कि किसी भी पारंपरिक ग्रेजुएशन प्रोग्राम में सबसे ज्यादा है। इसी दौरान कॉमर्स में दाखिले करीब 20% कम हुए, जबकि साइंस कोर्स में करीब 11% की बढ़ोतरी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने सिलेबस और गिरते शैक्षणिक स्तर की वजह से छात्र अब इंडस्ट्री ओरिएंटेड प्रोग्राम की तरफ जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो महंगे प्राइवेट कॉलेजों की फीस नहीं भर सकते।

इसी बीच मुंबई यूनिवर्सिटी ने अनुशासन और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। यूनिवर्सिटी ने 102 लॉ और बी.एड कॉलेजों पर जुर्माना लगाया है क्योंकि वहां स्वीकृत शिक्षक नहीं थे। 39 लॉ और 29 बी.एड कॉलेजों की छात्र संख्या 50% कम कर दी गई और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं 11 लॉ और 23 बी.एड कॉलेजों की छात्र संख्या 25% घटाई गई और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा, बुनियादी सुविधाओं और नियमों का पालन न करने वाले 30 बी.एड कॉलेजों की मान्यता भी रद्द कर दी गई है।

भविष्य की तैयारी करते हुए यूनिवर्सिटी 2027-28 सत्र से 12 नए स्किल-बेस्ड और मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज खोलने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव को 22 जुलाई को यूनिवर्सिटी सीनेट के सामने रखा जाएगा। अब यूनिवर्सिटी पारंपरिक आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस और लॉ के नए कॉलेजों को मंजूरी नहीं देगी। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. रविंद्र कुलकर्णी ने बताया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) को लागू करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर अंडरग्रेजुएट शिक्षा में जहां छात्र चार साल की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

छात्रों की सुविधा के लिए यूनिवर्सिटी ने भारी बारिश के कारण यूजी और पीजी एडमिशन की तारीख बढ़ाकर 15 जुलाई 2026 कर दी थी, जिससे कई छात्रों को राहत मिली।