Mumbai में पेड़ गिरने से और Lucknow में आग से बच्चों की मौत, सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल
Maharashtra/Uttar Pradesh: देश के दो बड़े शहरों मुंबई और लखनऊ में हाल ही में हुए हादसों ने मासूम बच्चों की जान ले ली। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब बच्चों की मौत होती है, तो क्या कोई वास्तव में जव
Maharashtra/Uttar Pradesh: देश के दो बड़े शहरों मुंबई और लखनऊ में हाल ही में हुए हादसों ने मासूम बच्चों की जान ले ली। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब बच्चों की मौत होती है, तो क्या कोई वास्तव में जवाबदेह होता है। मुंबई में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरा और लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर वाली बिल्डिंग में भीषण आग लगी, जिसमें कई बच्चों की जान चली गई।
मुंबई के Chembur इलाके में 30 जून 2026 को एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ Universal School की बस पर पेड़ गिर गया, जिससे 11 साल के विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई। इस घटना के बाद BMC ने लापरवाही बरतने के आरोप में असिस्टेंट गार्डन सुपरिटेंडेंट जगदीश भोइर और सब इंजीनियर अरुण मुंडे को सस्पेंड कर दिया है। BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने एक जांच कमेटी बनाई है जो 8 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। हालांकि, कैबिनेट मंत्री संजय पांडुरंग शिरसाट ने पहले कहा था कि पेड़ गिरना या बिजली गिरना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी बात साफ़ करते हुए कहा कि प्रशासन को मानसून से पहले खतरनाक पेड़ों को हटाना चाहिए था। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने पीड़ित परिवार को 2.5 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान किया है।
वहीं, लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून 2026 को एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। इस बिल्डिंग में ‘Learning Space’ नाम का कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और कंप्यूटर ग्राफिक्स सेक्शन चलता था। इस हादसे में करीब 14 से 15 बच्चों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। मामले की गहराई से जांच के लिए एक SIT (Special Investigation Team) का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर दुख जताया और पीड़ितों के लिए राहत राशि की घोषणा की। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।
इन हादसों के बीच भारत में बच्चों की मृत्यु दर के आंकड़े भी सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बताया कि 1990 में 1,000 जीवित जन्मों पर 127 बच्चों की मौत होती थी, जो 2024 में घटकर 27 रह गई है। सरकार ने जननी सुरक्षा योजना और टीकाकरण जैसे प्रोग्राम्स के जरिए इसे कम किया है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।