Maharashtra : मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने भगोड़े हीरा व्यापारी Nirav Modi और अन्य लोगों से जुड़े 321.88 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर करने की इजाजत दे दी है। CBI ने यह अर्जी इसलिए दी
Maharashtra : मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने भगोड़े हीरा व्यापारी Nirav Modi और अन्य लोगों से जुड़े 321.88 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर करने की इजाजत दे दी है। CBI ने यह अर्जी इसलिए दी क्योंकि जांच में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत नहीं मिले। अब यह केस स्पेशल CBI कोर्ट के बजाय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में चलेगा।
कोर्ट ने केस ट्रांसफर क्यों किया?
CBI ने अदालत को बताया कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के किसी भी सरकारी कर्मचारी या निजी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कोई सबूत नहीं मिला है। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विक्रम सिंह ने कहा कि अब फाइनल चार्जशीट सिर्फ निजी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दाखिल की जाएगी। इसी आधार पर स्पेशल जज J.P. Darekar ने मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट भेजने का फैसला सुनाया।
किन्हें लगाया गया है आरोप और क्या हैं धाराएं?
इस मामले में Nirav Modi के साथ-साथ रवि शंकर गुप्ता, विपुल अंबानी और Firestar International Limited (FIL) व Firestar Diamonds International Private Limited (FDIPL) के अन्य निदेशकों और अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। शुरुआत में इन पर IPC की धारा 120-B (साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) लगाई गई थी, लेकिन अब भ्रष्टाचार वाली धाराएं हटा दी गई हैं।
केस की मुख्य जानकारी
| विवरण |
जानकारी |
| कुल धोखाधड़ी राशि |
321.88 करोड़ रुपये |
| शिकायतकर्ता बैंक |
Punjab National Bank (PNB) |
| मुख्य आरोपी |
Nirav Modi और अन्य |
| नया कोर्ट |
Additional Chief Metropolitan Magistrate (Esplanade Court) |
| जांच एजेंसी |
CBI |
Frequently Asked Questions (FAQs)
Nirav Modi के इस केस में अब आगे क्या होगा?
CBI अब केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी और इस केस की सुनवाई मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट (Esplanade Court) में होगी।
सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
CBI की जांच में PNB के सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई ठोस सबूत नहीं मिले, इसलिए उन पर आरोप नहीं लगाए गए।