Mumbai में स्मार्ट मीटर को लेकर नागरिकों का विरोध, बिजली कंपनियों के खिलाफ दर्ज कराईं शिकायतें

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। रविवार, 19 जुलाई 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता कमलाकर शेनॉय और जी आर वोरा के नेतृत्व में एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया गया। इ

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। रविवार, 19 जुलाई 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता कमलाकर शेनॉय और जी आर वोरा के नेतृत्व में एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का मकसद स्मार्ट मीटर से परेशान लोगों की समस्याएं सुनना और उनकी शिकायतें इकट्ठा करना था।

यह अभियान मुंबई के माटुंगा ईस्ट, भायखला, परेल विलेज, विले पारले, सांताक्रूज ईस्ट, धारावी, वाशी, ठाणे और विरार वेस्ट जैसे कई इलाकों में चलाया गया। इस दौरान करीब 100 लिखित शिकायतें मिलीं। लोगों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना मीटर बदले गए और बिजली के बिल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इन शिकायतों को बिजली कंपनियों और पुलिस के पास ले जाएंगे और जरूरत पड़ी तो कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

दूसरी तरफ, MSEDCL (महावितरण), BEST, Adani Electricity और Tata Power जैसी कंपनियों ने इन आरोपों को गलत बताया है। कंपनियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग ज्यादा सही और आसान होती है। महावितरण के मुख्य अभियंता राजेश नाइक ने बताया कि बिजली अधिनियम 2003 और 2026 के नियमों के तहत स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग मीटर लगाने में रुकावट डालेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इस विवाद में नागपुर की स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। वहां महावितरण ने उन उपभोक्ताओं को चेतावनी पत्र भेजे हैं जो स्मार्ट मीटर नहीं लगवा रहे हैं। वहीं, नागरिक समूह के संयोजक मोहन शर्मा ने कहा कि उन्हें स्मार्ट मीटर से दिक्कत नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि मीटर लगाते समय बिजली चोरी के झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता कमलाकर शेनॉय ने यह भी आशंका जताई है कि इन मीटरों की भारी लागत, जो करीब 12,000 रुपये प्रति मीटर है, भविष्य में बिजली की दरों में बढ़ोतरी के जरिए आम जनता से ही वसूली जाएगी।