Maharashtra: मुंबई के साकीनाका इलाके में एक दिव्यांग महिला को रेस्टोरेंट में एंट्री देने से मना कर दिया गया। प्रियंका पाल नाम की महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ इसलिए अंदर नहीं जाने दिया गया क्योंकि वह शारीरिक रूप से
Maharashtra: मुंबई के साकीनाका इलाके में एक दिव्यांग महिला को रेस्टोरेंट में एंट्री देने से मना कर दिया गया। प्रियंका पाल नाम की महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ इसलिए अंदर नहीं जाने दिया गया क्योंकि वह शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। इस घटना के बाद दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों और कानूनी जानकारों में काफी गुस्सा है।
रेस्टोरेंट ने क्या कहा और महिला का क्या आरोप है
प्रियंका पाल एक फ्रीलांस प्रोफेशनल हैं। उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट ने ऑनलाइन खुद को व्हीलचेयर फ्रेंडली बताया था, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने इस व्यवहार को अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया। दूसरी तरफ, Tap Resto Bar के मैनेजर पांडेय ने कहा कि सुरक्षा कारणों से दिव्यांग या घायल लोगों के लिए उनके यहां नियम है, क्योंकि डांस फ्लोर के पास काफी भीड़ रहती है।
कानून क्या कहता है और एक्सपर्ट्स की क्या राय है
कानूनी एक्सपर्ट Karnani के मुताबिक, कोई भी प्राइवेट संस्थान एंट्री के नियम बना सकता है, लेकिन वह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता। उन्होंने इस घटना को गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण बताया। वहीं, एक्टिविस्ट सिद्धार्थ म्हात्रे ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर किसी को सार्वजनिक जगह से रोकना गलत है। दिव्यांग लोगों को भी दूसरों की तरह सामाजिक जीवन जीने का पूरा हक है।
RPwD एक्ट 2016 के तहत क्या नियम हैं
- The Rights of Persons with Disabilities (RPwD) Act, 2016 के तहत दिव्यांगों के साथ भेदभाव करना मना है।
- संस्थानों को ‘Equal Opportunity Policy’ बनानी और उसे डिस्प्ले करना जरूरी है।
- प्रतिष्ठानों को अपनी बिल्डिंग और सुविधाओं को दिव्यांगों के अनुकूल (Reasonable Accommodation) बनाना होता है।
- अगर भेदभाव की शिकायत आती है, तो संस्थान के प्रमुख को लिखित में कारण बताना होता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
RPwD एक्ट 2016 क्या है?
यह एक कानून है जो दिव्यांग व्यक्तियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकता है। यह उन्हें समाज में समान अवसर, समावेश और जरूरी सुविधाएं देने का आदेश देता है।
क्या प्राइवेट रेस्टोरेंट दिव्यांगों को रोकने का नियम बना सकते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, प्राइवेट संस्थान नियम बना सकते हैं लेकिन वे संवैधानिक अधिकारों और गरिमा का उल्लंघन नहीं कर सकते। सुरक्षा के नाम पर पूरी तरह बैन लगाना गलत माना गया है।