Mumbai में बारिश का कहर, खुले मैनहोल और गिरते पेड़ों ने ली जान; Delhi में शुरू होगा पहला बड़ा Tree Census
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में मानसून की भारी बारिश ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। पिछले कुछ दिनों में शहर के अलग-अलग इलाकों में खुले मैनहोल, गिरते पेड़ों और करंट लगने से कई लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद प्र
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में मानसून की भारी बारिश ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। पिछले कुछ दिनों में शहर के अलग-अलग इलाकों में खुले मैनहोल, गिरते पेड़ों और करंट लगने से कई लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है और कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है।
मुंबई के चेंबूर इलाके में 30 जून को एक बड़ा हादसा हुआ, जहां स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 साल के छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई और चार अन्य बच्चे घायल हो गए। वहीं 2 जुलाई को चांदिवली में खुले मैनहोल में गिरने से 55 साल के असलम इसाफ शेख की जान चली गई। मुंब्रा के जलजमाव वाले इलाके में करंट लगने से 17 साल की आलिया चांदीवाला की मौत हो गई और वालकेश्वर में बालकनी गिरने से एक 51 साल के व्यक्ति की जान गई।
इन हादसों के बाद BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने सख्त एक्शन लिया है। मैनहोल हादसे के जिम्मेदार चार BMC अधिकारियों, जिनमें असिस्टेंट कमिश्नर धनजी हरलेकर और अन्य इंजीनियर शामिल हैं, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मेयर रितु तावड़े ने मृतक असलम के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। बिजली विभाग की कंपनी Torrent Power के अधिकारियों पर भी FIR दर्ज हुई है।
Delhi: दूसरी तरफ दिल्ली में पेड़ों की गिनती यानी Tree Census का काम अब रफ्तार पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शहर के पहले आधिकारिक फुल-स्केल ट्री सेंसस की शुरुआत की घोषणा की है। यह कदम दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट 1994 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने पहले चरण में 2.9 करोड़ रुपये दिए हैं। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) इस पूरे सर्वे की निगरानी करेगा। यह काम तीन चरणों में पूरा होगा और इसमें करीब चार साल का समय लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि शहर के रिहायशी इलाकों में कितने पेड़ हैं और उनकी सेहत कैसी है। इससे अवैध कटाई रोकने और नए पेड़ लगाने की प्लानिंग में मदद मिलेगी।