Maharashtra: मुंबई और पुणे के बीच सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का बहुप्रतीक्षित ‘Connecting Link’ अब पूरी तरह से चालू हो गया है। इस नए रास्ते के खुलने से न केवल यात्रा का स
Maharashtra: मुंबई और पुणे के बीच सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का बहुप्रतीक्षित ‘Connecting Link’ अब पूरी तरह से चालू हो गया है। इस नए रास्ते के खुलने से न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि खंडाला घाट के पास लगने वाले भारी जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी।
Connecting Link से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
यह नया लिंक 13.3 किलोमीटर लंबा है जो रायगढ़ जिले के खोपोली को पुणे जिले के कुसगांव से जोड़ता है। इस रास्ते के इस्तेमाल से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी करीब 6 किलोमीटर कम हो गई है। अब यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट की बचत होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब ड्राइवरों को खंडाला घाट के खतरनाक और घुमावदार रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा।
प्रोजेक्ट की खासियतें और जरूरी नियम
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इस प्रोजेक्ट को ‘इंजीनियरिंग का कमाल’ बताया है। इसमें दो सुरंगें बनाई गई हैं, जिनमें से एक 8.87 किलोमीटर लंबी है और दुनिया की सबसे चौड़ी सड़कों वाली सुरंगों में गिनी जाती है। साथ ही, टाइगर वैली पर 650 मीटर लंबा केबल-स्टेयड ब्रिज बनाया गया है, जो भारत का सबसे ऊंचा पुल है। सुरक्षा के लिहाज से फिलहाल इस रास्ते पर सिर्फ कार और बस जैसी हल्की गाड़ियों को ही अनुमति दी गई है, जबकि भारी ट्रकों को पुराने घाट वाले रास्ते से ही जाना होगा।
टोल और समय सीमा की जानकारी
MSRDC ने साफ किया है कि इस नए लिंक का उपयोग करने के लिए यात्रियों को कोई अलग से अतिरिक्त टोल नहीं देना होगा। इस प्रोजेक्ट की नींव 2019 में रखी गई थी और इसे दिसंबर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन कोरोना महामारी और लोनावला झील के नीचे टनल बनाने जैसी तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसमें देरी हुई। अब 1 मई 2026 को पुणे जाने वाला रास्ता और 2 मई 2026 को मुंबई जाने वाला रास्ता पूरी तरह खोल दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या नए Connecting Link के लिए अलग से टोल देना होगा?
नहीं, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नए लिंक का उपयोग करने के लिए कोई अतिरिक्त टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इस नए रास्ते पर कौन सी गाड़ियां चल सकती हैं?
फिलहाल सुरक्षा कारणों से केवल हल्की मोटर गाड़ियां (LMV) और बसों को ही अनुमति है, भारी मालवाहक वाहनों को पुराने घाट रूट का उपयोग करना होगा।