Mumbai में Prenup एग्रीमेंट पर चर्चा, जानकारों ने कहा UCC के बिना संभव नहीं

Maharashtra: मुंबई में मंगलवार को शादी से पहले होने वाले समझौते यानी Prenuptial Agreements (Prenups) को लेकर एक बड़ी चर्चा हुई। IMC Chamber of Commerce and Industry की Ladies’ Wing ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।

Maharashtra: मुंबई में मंगलवार को शादी से पहले होने वाले समझौते यानी Prenuptial Agreements (Prenups) को लेकर एक बड़ी चर्चा हुई। IMC Chamber of Commerce and Industry की Ladies’ Wing ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें कानूनी जानकारों और पूर्व मंत्रियों ने इस बात पर बहस की कि क्या भारत में ऐसे समझौतों को कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए और इसके लिए Uniform Civil Code (UCC) क्यों जरूरी है।

इस चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस Jasti Chelameswar ने कहा कि प्रिनप्स (Prenups) देश की पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं हैं। वहीं, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव Brijesh Singh ने साफ किया कि प्रिनप्स जरूरी तो हैं, लेकिन UCC के बिना इन्हें लागू करना मुमकिन नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना किसी तय कानून के, ऐसे समझौते कोर्ट में चुनौती दिए जा सकते हैं और इससे कमजोर पक्ष, खासकर महिलाओं को गुजारा भत्ता (Alimony) मिलने में दिक्कत आ सकती है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री Smriti Irani ने इस बात पर जोर दिया कि केवल प्रिनप्स को महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी मान लेना एक छोटी सोच होगी। वहीं, मुंबई की तलाक विशेषज्ञ वकील Mridula Kadam का मानना था कि भारत अभी इसके लिए तैयार नहीं है। उनके मुताबिक, इसका फायदा सिर्फ अमीर और शहर के लोगों को मिलेगा, जबकि ग्रामीण इलाकों की बेटियों के लिए यह नुकसानदेह साबित हो सकता है।

दूसरी तरफ, इंदिरा जयसिंह और अन्य वकीलों ने इसका समर्थन किया। उनका कहना था कि इससे तलाक के बाद होने वाले लंबे कानूनी झगड़ों और विवादों को कम किया जा सकता है। फिलहाल भारत में गोवा को छोड़कर किसी भी राज्य में प्रिनप्स को आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, क्योंकि यहाँ शादी को एक कॉन्ट्रैक्ट के बजाय एक संस्कार माना जाता है।