Maharashtra: मुंबई में एक तरफ जहां नई टनल बोरिंग मशीनें (TBM) लॉन्च हो रही हैं, वहीं Powai इलाके में एक जर्मन मशीन पिछले कई सालों से जमीन के नीचे दबी पड़ी है। यह मशीन पानी की पाइपलाइन के लिए सुरंग बना रही थी, लेकिन अचानक
Maharashtra: मुंबई में एक तरफ जहां नई टनल बोरिंग मशीनें (TBM) लॉन्च हो रही हैं, वहीं Powai इलाके में एक जर्मन मशीन पिछले कई सालों से जमीन के नीचे दबी पड़ी है। यह मशीन पानी की पाइपलाइन के लिए सुरंग बना रही थी, लेकिन अचानक एक ऐसी जगह फंस गई जहां से इसे निकालना नामुमकिन हो गया। अब BMC ने इस मशीन को वहीं छोड़ने और नए सिरे से काम शुरू करने का फैसला किया है।
यह मशीन जमीन के नीचे कैसे फंसी और क्या थी समस्या?
यह घटना अगस्त 2019 की है जब Powai से Ghatkopar तक पानी की सुरंग बनाने का काम चल रहा था। लगभग 1.2 किलोमीटर खुदाई करने के बाद यह मशीन ज्वालामुखी की राख (volcanic ash) और कीचड़ जैसी मिट्टी में फंस गई। BMC अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई में आमतौर पर सख्त चट्टानें (basalt rock) मिलती हैं, लेकिन Powai के इस हिस्से में मिट्टी बहुत नरम और दलदली थी, जिससे मशीन की पकड़ छूट गई और वह धंस गई। मशीन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा जमीन के अंदर दब चुका था, जिससे वहां पानी का रिसाव होने लगा और उसे बाहर निकालना असंभव हो गया।
कितना हुआ नुकसान और अब क्या है BMC का प्लान?
मशीन को निकालने के लिए IIT Bombay और कई विशेषज्ञों से सलाह ली गई, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। इसके बाद BMC ने पुराने कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर 2022 में नया टेंडर जारी किया। इस पूरी देरी और नई शुरुआत की वजह से प्रोजेक्ट की लागत में 419 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
| विवरण |
जानकारी/लागत |
| मशीन की स्थिति |
Shipping Corporation of India (SCI) के नीचे 60 मीटर गहराई पर |
| कुल लागत वृद्धि |
419 करोड़ रुपये |
| पुराने काम का भुगतान |
147 करोड़ रुपये (जिसमें 38.5 करोड़ फंसी मशीन के लिए हैं) |
| नया बजट |
360 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे |
| बची हुई दूरी |
मंजिल से अभी भी 3 किलोमीटर दूर |
आगे का काम कैसे पूरा होगा?
BMC ने अब एक नई TBM मशीन तैनात करने और एक बिल्कुल नई सुरंग खोदने का फैसला किया है। नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत अब एजेंसी ही डिजाइन, प्लानिंग और निर्माण की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है या मशीन फंसती है, तो उसका खर्च भी ठेकेदार को ही उठाना होगा। जल आपूर्ति परियोजना के मुख्य अभियंता Shirish Uchgaonkar ने बताया कि भूगर्भीय बनावट की वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया था, इसलिए अब नए तरीके से काम किया जा रहा है।