Mumbai Port का बड़ा बदलाव, 22,672 करोड़ रुपये से संवरेगा ईस्टर्न वॉटरफ्रंट, बढ़ेगी कमाई और पर्यटन
Maharashtra: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) शहर के समुद्री कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। पोर्ट अब सिर्फ माल ढोने का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि इसे लॉजिस्टिक्स, लग्जरी पर्यटन और सस्टेनेबिलिटी का एक बड़ा मॉ
Maharashtra: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) शहर के समुद्री कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। पोर्ट अब सिर्फ माल ढोने का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि इसे लॉजिस्टिक्स, लग्जरी पर्यटन और सस्टेनेबिलिटी का एक बड़ा मॉडल बनाया जा रहा है। इस बदलाव का मकसद पोर्ट की कमाई के नए रास्ते खोलना और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
मुंबई पोर्ट के चेयरमैन एम अंगमुथु ने बताया कि दुनिया भर के पोर्ट अब केवल कार्गो गेटवे नहीं रहे, बल्कि वे इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक जोन बन रहे हैं और मुंबई पोर्ट भी अब इसी रास्ते पर चल रहा है। इसके तहत ईस्टर्न वॉटरफ्रंट ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम पर करीब 22,672 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से खाली पड़ी जमीनों का इस्तेमाल पर्यटन और कमर्शियल कामों के लिए होगा, जिससे शहर के लोगों को नए रोजगार और सुविधाएं मिलेंगी।
पोर्ट ने साल 2047 तक के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके जरिए कार्गो हैंडलिंग की क्षमता को मौजूदा 85.85 MTPA से बढ़ाकर 150 मिलियन टन सालाना करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुंबई मरीना, इंटरनेशनल सेलिंग सेंटर और वडाला आर्ट डिस्ट्रिक्ट जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम होगा। घरेलू क्रूज टर्मिनल के पास एक मिनी मरीना बनाने का प्रस्ताव भी है ताकि छोटी नावों की पार्किंग और बर्थिंग व्यवस्थित हो सके।
पोर्ट को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए दो नए डीप-वॉटर एंकरेज 2027 तक तैयार हो जाएंगे। इसके अलावा, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ‘ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम’ के जरिए पुराने जहाजों की जगह कम प्रदूषण फैलाने वाले हाइब्रिड टग्स लाए जाएंगे।
| प्रोजेक्ट/क्षेत्र | विवरण/निवेश |
|---|---|
| ईस्टर्न वॉटरफ्रंट ट्रांसफॉर्मेशन | 22,672 करोड़ रुपये का निवेश |
| लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल पार्क | 78,600 करोड़ रुपये के MoU (जिसमें 23,000 करोड़ के पार्क शामिल) |
| एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (HPCL/BPCL) | 2,700 करोड़ रुपये का निवेश (क्रूड स्टोरेज के लिए) |
| नया ऑयल बर्थ (JD-6) | 400 करोड़ रुपये की लागत |
| कार्गो क्षमता लक्ष्य (2047) | 150 मिलियन टन सालाना |
पोर्ट अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अब रियल एस्टेट, क्रूज टूरिज्म और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) जैसे नए तरीकों पर जोर दे रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में मजबूती के लिए HPCL और BPCL के साथ मिलकर 13 हेक्टेयर जमीन पर कच्चे तेल के भंडारण की सुविधा विकसित की जा रही है।