Mumbai में रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल और परिवार को मिलेगी सुरक्षा, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस को दिए सख्त निर्देश

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को निर्देश दिया है कि जस्टिस पटेल को पूरी सुरक्षा दी जाए। यह आदेश

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को निर्देश दिया है कि जस्टिस पटेल को पूरी सुरक्षा दी जाए। यह आदेश उस समय आया जब जस्टिस पटेल और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं।

मामला तब बढ़ा जब जस्टिस पटेल ने मुंबई के गामदेवी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। दरअसल, जस्टिस पटेल को उनके लंदन स्थित घर पर धमकियां मिल रही थीं और उनकी बेटी के साथ वहां मारपीट भी हुई थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जजों को दी जाने वाली धमकियां न्यायिक आजादी पर हमला हैं और इस पर तुरंत एक्शन होना चाहिए।

कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि मुंबई में जस्टिस पटेल और उनकी पत्नी की सुरक्षा के लिए दो पुलिस अधिकारी हर समय उनके साथ तैनात रहेंगे। साथ ही, मुंबई पुलिस कमिश्नर को इस पूरे मामले की जांच खुद देखनी होगी और 2 जुलाई तक कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। मुंबई पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3) और 351(4) के तहत आपराधिक धमकी का केस दर्ज कर लिया है।

इस पूरे विवाद की जड़ अप्रैल 2024 में दिया गया एक फैसला माना जा रहा है, जो दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद से जुड़ा था। जस्टिस पटेल ने रिटायर होने से ठीक दो दिन पहले यह फैसला सुनाया था। इसके बाद से लंदन में उनके घर में घुसने की कोशिश, धमकी भरे पत्र और उनकी बेटी के साथ हमले की घटनाएं सामने आईं। जून 2026 में उन्हें जर्मनी के डाक निशान वाला एक खत मिला, जिसमें जान से मारने की धमकी दी गई थी और एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस भी भेजा गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारतीय उच्चायुक्त से इस मुद्दे पर बात की, जिसके बाद लंदन पुलिस ने वहां सुरक्षा मुहैया कराई। बॉम्बे बार एसोसिएशन ने भी इस घटना की निंदा की है और भारत सरकार से अपील की है कि वे ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट मांगी है कि लंदन में हुई हमले की घटना पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।