Mumbai में PMAY के तहत 15 हजार घर खाली, महंगी जमीन और बैंक लोन की समस्या बनी बड़ी रुकावट
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में सस्ते घर दिलाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही है। MHADA के करीब 10,000 से 15,000 घर ऐसे हैं जिन्हें अब तक किसी को अलॉट नहीं किया ज
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में सस्ते घर दिलाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही है। MHADA के करीब 10,000 से 15,000 घर ऐसे हैं जिन्हें अब तक किसी को अलॉट नहीं किया जा सका है। इसका मुख्य कारण जमीन की बढ़ती कीमतें और आम लोगों को बैंक लोन मिलने में आने वाली दिक्कतें हैं।
BRICS फ्रेंडशिप सिटीज कॉन्क्लेव में MHADA के CEO संजीव जायसवाल ने इन चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में जमीन इतनी महंगी है कि घरों की लागत बढ़ गई है। साथ ही, जिन लोगों की कमाई हर महीने एक जैसी नहीं रहती, उन्हें बैंक लोन मिलने में बहुत मुश्किल आती है, जिसकी वजह से वे घर नहीं खरीद पा रहे हैं।
योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और घर की असल कीमत के बीच का अंतर भी एक बड़ी समस्या है। इस स्थिति को नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| PMAY सब्सिडी राशि | 2.5 लाख रुपये |
| घर की अनुमानित कीमत (तितवाला और कल्याण) | 12 लाख से 15 लाख रुपये |
| बिना अलॉट हुए घरों की संख्या | 10,000 से 15,000 |
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने PMAY-U 2.0 के तहत देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2.09 लाख अतिरिक्त घरों की मंजूरी दी है, जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि फंड समय पर जारी किए जाएं और निगरानी सही तरीके से हो ताकि पात्र परिवारों को घर मिल सके।
PMAY के नियमों के मुताबिक, सब्सिडी का लाभ उन लोगों को मिलता है जिनकी सालाना आय एक तय सीमा के भीतर है। यह सब्सिडी होम लोन के ब्याज पर मिलती है, जिससे कर्ज का बोझ कम होता है। हालांकि, बैंक की सख्त शर्तों और आय के प्रमाण की कमी के कारण मुंबई के कई गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।