Maharashtra : मुंबई में नए घर खरीदने वालों और बिल्डरों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शहर में कई प्रोजेक्ट्स के घर तो बनकर तैयार हैं, लेकिन कार पार्किंग लिफ्ट की कमी की वजह से उनका पजेशन यानी हैंडओवर नहीं हो पा रहा ह
Maharashtra : मुंबई में नए घर खरीदने वालों और बिल्डरों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शहर में कई प्रोजेक्ट्स के घर तो बनकर तैयार हैं, लेकिन कार पार्किंग लिफ्ट की कमी की वजह से उनका पजेशन यानी हैंडओवर नहीं हो पा रहा है। इस वजह से घर खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही काफी तनाव में हैं।
पार्किंग लिफ्ट की कमी से क्या हो रहा है असर
मुंबई जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में जगह कम होने के कारण बिल्डर्स मैकेनिकल पार्किंग और पार्किंग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। अब इन लिफ्ट्स की कमी की वजह से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में देरी हो रही है। इसके अलावा, प्रभादेवी के De-Abero बिल्डिंग जैसे कुछ प्रोजेक्ट्स में तो शिफ्टिंग के बाद भी लोगों को चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग स्पेस नहीं मिला है।
MahaRERA और नियमों का क्या कहना है
पार्किंग को लेकर MahaRERA ने साफ किया है कि अगर सेल एग्रीमेंट में पार्किंग का जिक्र नहीं है और उसके लिए अलग से पेमेंट नहीं किया गया है, तो खरीदार पार्किंग का दावा नहीं कर सकता। वहीं, मैकेनिकल पार्किंग सिस्टम में खराबी आने पर उसे हटाने या बदलने के आदेश देने का अधिकार MahaRERA के पास नहीं है, क्योंकि Occupation Certificate मिलने का मतलब है कि प्रोजेक्ट मंजूर प्लान के हिसाब से बना है।
प्रोजेक्ट्स में देरी के अन्य कारण
पार्किंग के अलावा, मुंबई में निर्माण कार्य को लेकर नए प्रस्ताव भी चर्चा में हैं। शिव सेना (UBT) विधायक वरुण सरदेसाई ने रविवार और सरकारी छुट्टियों पर प्राइवेट कंस्ट्रक्शन रोकने की मांग की है ताकि शोर कम हो। हालांकि, हाउसिंग सेक्टर के लोगों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो प्रोजेक्ट्स में साल भर में कम से कम तीन महीने की देरी होगी और लागत भी बढ़ेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या मैं अपने घर के लिए पार्किंग का दावा कर सकता हूँ?
MahaRERA के नियमों के अनुसार, आप पार्किंग का दावा तभी कर सकते हैं जब वह आपके रजिस्टर्ड सेल एग्रीमेंट में लिखा हो और आपने उसके लिए अलग से भुगतान किया हो।
BKC में पार्किंग नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?
राज्य सरकार ने BKC के ‘E’ और ‘G’ ब्लॉक में बिल्डरों को पार्किंग की जरूरतों में 50% तक की छूट देने का फैसला किया है, ताकि जगह की कमी वाली इमारतों में निर्माण आसान हो सके।