Mumbai में नए बिल्डिंग नियमों से बढ़ेगा कंक्रीट का जाल, आर्किटेक्ट ने दी शहर के भविष्य को लेकर चेतावनी

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में नए बिल्डिंग नियमों की वजह से शहर में कंक्रीट के जंगल बढ़ने का खतरा है। आर्किटेक्ट और अर्बन डिजाइनर Samir D’Monte ने चेतावनी दी है कि DCPR-2034 के तहत बढ़ते FSI की वजह से शहर की आबादी औ

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में नए बिल्डिंग नियमों की वजह से शहर में कंक्रीट के जंगल बढ़ने का खतरा है। आर्किटेक्ट और अर्बन डिजाइनर Samir D’Monte ने चेतावनी दी है कि DCPR-2034 के तहत बढ़ते FSI की वजह से शहर की आबादी और गाड़ियों का दबाव इतना बढ़ जाएगा कि रहने लायक जगह कम हो जाएगी।

समरी डी मोंटे ने Bandra (W) का उदाहरण देते हुए बताया कि 1950 के दशक में एक गली में 10 प्लॉट और करीब 50 लोग रहते थे। 1990 के दशक में FSI बढ़ने से वहां 200 अपार्टमेंट और 800 लोग रहने लगे। अब नए नियमों के बाद अनुमान है कि 2040 तक इसी गली में 300 अपार्टमेंट, 1350 लोग और 450 गाड़ियां होंगी, जिससे ट्रैफिक और भीड़ बेकाबू हो जाएगी।

महाराष्ट्र राज्य शहरी विकास विभाग ने 6 मई 2026 को DCPR-2034 में बदलाव किया है। अब रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स में योगशाला और फिटनेस सेंटर जैसी सुविधाओं के लिए FSI-free लिमिट को 2% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है। वहीं कमर्शियल बिल्डिंग्स के लिए ऐसी सुविधाएं 100% प्रीमियम देने पर मिलेंगी। PEATA के सचिव Milind Changani ने इस बदलाव का स्वागत किया है और कहा है कि इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

दूसरी तरफ, मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इस विकास पर गंभीर सवाल उठाए हैं। IMA मुंबई वेस्ट के पूर्व अध्यक्ष Dr. Arshad G Mohammad और पल्मोनोलॉजिस्ट Dr. Sujeet K Rajan ने बताया कि ऊंचे टावरों और कम खुली जगहों की वजह से निर्माण धूल और प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे लोगों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गहरी बेसमेंट की खुदाई और लगातार निर्माण कार्य से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिसे अब एक मेडिकल इमरजेंसी की तरह देखा जाना चाहिए।