Mumbai में NEET पेपर लीक पर बवाल, आदित्य और अमित ठाकरे ने मांगा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
Maharashtra: मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस ‘तिरंगा मार्च’ में ठाकरे परिवार के चचेरे भाई आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने केंद्र सर
Maharashtra: मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस ‘तिरंगा मार्च’ में ठाकरे परिवार के चचेरे भाई आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
शिवसेना (UBT) द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आदित्य ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी भाजपा दबाव में आती है, वह सांप्रदायिक मुद्दों का सहारा लेती है। यह प्रदर्शन छात्रों और उनके भविष्य को लेकर जताया गया आक्रोश था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
इस मामले में राजनीतिक गहमागहमी तब और बढ़ गई जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संयुक्त विरोध को ‘राजनीतिक जुमला’ बताया। फडणवीस ने कहा कि ठाकरे भाई अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में छात्रों को हटाने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी हादसे को रोकने के लिए भीड़ को हटाना जरूरी था।
दूसरी तरफ, Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को लेकर सरकार के साथ बातचीत भी हुई। 24 जुलाई को CJP नेताओं की मुलाकात केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई थी। सरकार ने सिद्धांत रूप में दो मांगों को मान लिया है, जिसमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारी छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करना शामिल है। हालांकि, CJP के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक ऐसी मांग है जिस पर कोई समझौता नहीं होगा।
इस पूरे विवाद के बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना 26 दिनों का अनशन खत्म किया। उन्हें सरकार से मुआवजे और कानूनी कार्रवाई न करने का आश्वासन मिला था। वहीं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार संसद में NEET-UG पेपर लीक के सभी पहलुओं पर चर्चा करने को तैयार है और इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
बता दें कि इस ‘तिरंगा मार्च’ के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली गई थी, जिसके कारण प्रशासन द्वारा मामले दर्ज किए जाने की संभावना है।