Maharashtra: मुंबई के मृणालताई गोरे एक्सटेंशन फ्लाईओवर को जनता के लिए खोल दिया गया है, लेकिन इसकी क्वालिटी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। उद्घाटन के तुरंत बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर सड़क की खराब सतह, गड्ढों और दरारों की
Maharashtra: मुंबई के मृणालताई गोरे एक्सटेंशन फ्लाईओवर को जनता के लिए खोल दिया गया है, लेकिन इसकी क्वालिटी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। उद्घाटन के तुरंत बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर सड़क की खराब सतह, गड्ढों और दरारों की तस्वीरें शेयर कीं। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2021 की एक आंतरिक रिपोर्ट में पहले ही इस पुल के निर्माण में बड़ी खामियों की चेतावनी दी गई थी।
2021 की विजिलेंस रिपोर्ट में क्या था खुलासा
BMC के इंटरनल विजिलेंस विभाग ने जनवरी 2021 में एक रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया गया था कि फ्लाईओवर के पिलर्स में दरारें थीं और कंक्रीट की मजबूती की जांच में यह फेल हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2019 और नवंबर 2020 में भी टेस्ट फेल हुए थे, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर 5,000 रुपये के बजाय सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
मौजूदा स्थिति और BMC का क्या कहना है
6 जून 2026 को मेयर ऋतु तावडे ने इस फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इसके बाद जब लोगों ने खराब सड़क की शिकायत की, तो मेयर ने मौके पर जाकर जांच की। उन्होंने अधिकारियों को छोटे गड्ढों और खुरदरे हिस्सों को ठीक करने के निर्देश दिए। वहीं, BMC के ब्रिज विभाग का कहना है कि पुल की बनावट में कोई कमी नहीं है और सड़क की ऊपरी सतह (mastic asphalt) शुरू में खुरदरी दिखती है, जो गाड़ियों के चलने से अपने आप ठीक हो जाएगी।
लागत और समय में कितनी हुई बढ़ोतरी
इस प्रोजेक्ट में समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी हुई है। यह फ्लाईओवर तय समय से करीब 40 महीने की देरी से बनकर तैयार हुआ। बजट की बात करें तो इसकी शुरुआती लागत 209 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर लगभग 248 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सड़क को जल्दबाजी में खोला गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मृणालताई फ्लाईओवर के निर्माण में क्या कमियां पाई गई थीं?
2021 की रिपोर्ट में कंक्रीट की मजबूती में फेलियर, पिलर्स में दरारें (honeycombing), खुरदरी फिनिशिंग और क्वालिटी रिकॉर्ड्स की कमी जैसी गंभीर खामियां बताई गई थीं।
फ्लाईओवर की लागत में कितनी बढ़ोतरी हुई?
इस प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 209 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन निर्माण पूरा होने तक यह बढ़कर लगभग 248 करोड़ रुपये हो गई।