Mumbai में मानसून का कहर, एक महीने से कम समय में गिरे 902 पेड़; BMC ने शुरू किया बड़ा अभियान

Maharashtra: मुंबई में भारी बारिश और तेज हवाओं ने शहर के हरे-भरे इलाकों को काफी नुकसान पहुंचाया है। पिछले कुछ हफ्तों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों पेड़ उखड़ गए और हजारों टहनियां टूटकर गिरीं, जिससे लोगों को आने-ज

Maharashtra: मुंबई में भारी बारिश और तेज हवाओं ने शहर के हरे-भरे इलाकों को काफी नुकसान पहुंचाया है। पिछले कुछ हफ्तों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों पेड़ उखड़ गए और हजारों टहनियां टूटकर गिरीं, जिससे लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हुई। BMC की टीमें सड़कों को साफ करने और स्थिति को सामान्य करने में जुटी हुई हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 22 जून से 17 जुलाई 2026 के बीच मुंबई में कुल 902 पेड़ उखड़े और 1,251 टहनियां गिरीं। BMC ने अब तक 3,841 जगहों से गिरे हुए पेड़ों और टहनियों को हटाने का काम पूरा कर लिया है, जबकि 542 जगहों पर अभी भी काम चल रहा है। नगर निगम के गार्डन विभाग की टीमें दिन-रात काम कर रही हैं ताकि ट्रैफिक औरC और आम जनता को कम से कम परेशानी हो।

इस साल मानसून के दौरान पेड़ गिरने की घटनाओं में तीन लोगों की जान गई है, जिनमें 30 जून को हुई एक दुर्घटना में 11 साल के बच्चे विहान श्रीवास्तव की भी मौत शामिल है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए BMC ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। 17 जुलाई को यह तय किया गया कि शहर से उन विदेशी सजावटी पेड़ों को हटाया जाएगा जो अस्थिर और खतरनाक हैं। इनकी जगह अब स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे जो मुंबई के वातावरण के लिए ज्यादा बेहतर और मजबूत होते हैं।

पेड़ों के गिरने के कारणों पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। BMC के मुख्य इंजीनियर मंतय्या स्वामी का कहना है कि पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट होने से उनके गिरने का खतरा नहीं बढ़ता, बल्कि यह तूफानी मानसून का असर है। वहीं, नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) के विशेषज्ञों का मानना है कि कंक्रीट की वजह से जड़ों का विकास रुक जाता है, जिससे पेड़ कमजोर होकर गिर जाते हैं। इसके अलावा अनियोजित निर्माण और रखरखाव की कमी को भी मुख्य कारण बताया गया है।

आने वाले समय में BMC वनस्पति विज्ञानियों (Botanists) और छात्रों की मदद से शहर के सभी पेड़ों का सर्वे कराएगी। इसमें पेड़ों की उम्र, प्रजाति और उनकी सेहत का पूरा डेटाबेस तैयार किया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश या तेज हवाओं के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें और किसी भी खतरे की सूचना हेल्पलाइन नंबर 1916 पर तुरंत दें।