Mumbai में मानसून की आहट, बेघर लोगों की बढ़ी मुश्किलें, बीमारियों का भी खतरा

Maharashtra: मुंबई में मानसून की शुरुआत के साथ ही सड़कों पर रहने वाले बेघर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्लास्टिक की छतों के नीचे रहने वाले परिवारों के लिए बारिश का मतलब है काम का कम होना, रहने की जगह का डूबना और गंभीर

Maharashtra: मुंबई में मानसून की शुरुआत के साथ ही सड़कों पर रहने वाले बेघर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्लास्टिक की छतों के नीचे रहने वाले परिवारों के लिए बारिश का मतलब है काम का कम होना, रहने की जगह का डूबना और गंभीर बीमारियों का खतरा। बांद्रा ईस्ट के रहने वाले 33 साल के शब्बीर खान ने अपने परिवार के लिए एक महीने की सूखी लकड़ियां जमा कर ली हैं, क्योंकि बारिश शुरू होने के बाद सूखी लकड़ियां मिलना नामुमकिन हो जाता है।

बारिश का असर सिर्फ रहने की जगह पर ही नहीं, बल्कि रोजी-रोटी पर भी पड़ा है। दादर के मुकेश झा जैसे दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलना कम हो गया है, जिससे उनके सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। नवी मुंबई में विनोधा भोसले के परिवार की झोपड़ी हालिया बारिश में डूब गई और उन्हें वहां से हटने को कहा गया।

हालात को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने समीक्षा बैठक की और इस मानसून में ‘जीरो कैजुअलिटी’ का लक्ष्य रखा है। उन्होंने BMC को डिजास्टर रिस्पांस फोर्स बनाने, नालों की सफाई पूरी करने और लैंडस्लाइड वाले इलाकों में सुरक्षा नेट लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मुंबई Suburban Guardian Minister आशीष शेलार ने रेलवे, BEST और मेट्रो अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन और फंसे हुए यात्रियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने का प्लान बनाने को कहा है।

MHADA ने भी 19 जून तक पुरानी और खतरनाक इमारतों की पहचान कर 86 ढांचों को खाली कराने और उनकी मरम्मत का काम शुरू किया है। MMRDA ने 25 मई से 15 अक्टूबर तक 24×7 डिजास्टर कंट्रोल रूम चालू रखा है और लेबर कैंपों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। BMC ने जलजमाव रोकने के लिए 547 पंप लगाए हैं।

इस बीच, SEAL Ashram ने ‘Mumbai Rescunite 2026’ अभियान शुरू किया है, जिसके तहत बांद्रा से कई बेघर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। इनके अलावा The Homeless Foundation और Pehchan India जैसे संगठन भी मदद कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस और टाइफाइड जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में मानसून के दौरान होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का होता है, जिनमें छोटे बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। दूषित पानी और गंदगी की वजह से स्किन इन्फेक्शन और पेट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।