Mumbai में भारी बारिश का अलर्ट, BMC ने खुले मैनहोल और पानी की कटौती को लेकर जारी की गाइडलाइन

Maharashtra: मुंबई में मानसून की बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी है। IMD ने मुंबई और ठाणे के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। शहर में कई इलाकों में जलजमा

Maharashtra: मुंबई में मानसून की बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी है। IMD ने मुंबई और ठाणे के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। शहर में कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

BMC ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें। पुराने और जर्जर मकानों, बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए BMC ने हेल्पलाइन नंबर 1916 जारी किया है। साथ ही, रेड अलर्ट के दौरान निर्माण कार्यों और खतरनाक लिफ्टिंग ऑपरेशंस को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

खुले मैनहोल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC से जवाब मांगा था। कोर्ट में प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि सभी मैनहोल पर ग्रिल लगा दिए जाएंगे। हालांकि, 8 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक करीब 2,205 मैनहोल अभी भी बिना ग्रिल के हैं। नगर आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा है कि वार्ड स्तर पर निगरानी की कमी रही है और इस काम को 26 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अब सभी मैनहोल की जियो-टैगिंग की गई है ताकि उनकी बेहतर जांच हो सके।

पानी की सप्लाई को लेकर भी शहर के लोग परेशान हैं। मुंबई की सात झीलों का जलस्तर 41.36% तक पहुंच गया है और विहार और तुलसी झीलें पूरी भर चुकी हैं। इसके बावजूद BMC ने 10% पानी की कटौती जारी रखी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सातों झीलें पूरी तरह नहीं भर जातीं और जुलाई के अंत तक लगातार बारिश नहीं होती, तब तक यह कटौती खत्म नहीं होगी।

बाढ़ रोकने के लिए BMC ने 547 पंप लगाए हैं और संवेदनशील इलाकों में 10 मोबाइल पंप सिस्टम तैनात किए हैं। नालों की सफाई का काम मई के अंत तक 80% पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन मीठी नदी की सफाई का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। पेड़ों की छंटाई के काम में भी लक्ष्य से कम काम हुआ है, जहां 84,000 पेड़ों की जगह 67,274 पेड़ों की ही छंटाई हो पाई है।