Maharashtra: मुंबई के महालक्ष्मी मेट्रो स्टेशन और मोनोरेल को जोड़ने के लिए बन रहे शहर के पहले ट्रैवलेटर वाले स्काईवॉक की लंबाई कम कर दी गई है। पहले यह पुल सीधे दोनों स्टेशनों को जोड़ता, लेकिन अब यात्रियों को बीच में उतरक
Maharashtra: मुंबई के महालक्ष्मी मेट्रो स्टेशन और मोनोरेल को जोड़ने के लिए बन रहे शहर के पहले ट्रैवलेटर वाले स्काईवॉक की लंबाई कम कर दी गई है। पहले यह पुल सीधे दोनों स्टेशनों को जोड़ता, लेकिन अब यात्रियों को बीच में उतरकर करीब 200 मीटर पैदल चलना होगा। इस बदलाव की वजह से अब लोगों को सात रास्ता (Jacob Circle) के भीड़भाड़ वाले फुटपाथों और सड़कों से होकर गुजरना पड़ेगा।
स्काईवॉक की लंबाई और लागत में क्या बदलाव हुए
शुरुआत में इस फुटओवर ब्रिज (FOB) की लंबाई 384 मीटर (कुछ रिपोर्ट्स में 405 मीटर) रखी गई थी। लेकिन नए डिजाइन के बाद इसे घटाकर 283 मीटर कर दिया गया है। यह स्काईवॉक अब जैकब सर्कल पर खत्म होगा, जो महालक्ष्मी मेट्रो स्टेशन से लगभग 200 मीटर दूर है। लंबाई कम होने से प्रोजेक्ट की लागत भी घटी है। पहले इसका बजट 82.66 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 70.05 करोड़ रुपये रह गया है, यानी करीब 10 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
क्यों छोटा करना पड़ा यह स्काईवॉक
MMRDA के अधिकारियों ने बताया कि BMC का एक फ्लाईओवर केशवराव खद्ये मार्ग से आ रहा है, जिसकी वजह से सीधा कनेक्शन बनाना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। इसके अलावा मेट्रो की अंडरग्राउंड टनल, इलाके का एक हेरिटेज पुलिस स्टेशन और जमीन के नीचे मौजूद पानी के टैंक और सीवर लाइनें भी बड़ी बाधा थीं। साथ ही, नए डिजाइन की वजह से जैकब सर्कल के 78 पेड़ों को काटने से बचा लिया गया है।
आम यात्रियों पर क्या होगा असर
अब यात्रियों को मोनोरेल से मेट्रो बदलने के लिए सात रास्ता राउंडअबाउट की तीन लेन पार करनी होगी। यह रास्ता काफी भीड़भाड़ वाला रहता है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि छोटा होने के बावजूद यह स्ट्रक्चर लोगों की आवाजाही को पहले से बेहतर बनाएगा। यह प्रोजेक्ट मुंबई के मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन प्लान का हिस्सा था, जिसका मकसद अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच आसान ट्रांसफर देना था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
स्काईवॉक की लंबाई कितनी कम हुई है और अब यात्रियों को कितना चलना होगा?
स्काईवॉक की लंबाई 384 मीटर से घटाकर 283 मीटर कर दी गई है। अब यात्रियों को जैकब सर्कल पर उतरकर महालक्ष्मी मेट्रो स्टेशन तक पहुँचने के लिए लगभग 200 मीटर पैदल चलना होगा।
प्रोजेक्ट की लागत में कितनी कमी आई है?
स्काईवॉक की लंबाई कम होने से प्रोजेक्ट की लागत 82.66 करोड़ रुपये से घटकर 70.05 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है।