Mumbai में पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए MHADA एक्ट में बदलाव, लाखों निवासियों को मिलेगी राहत
Maharashtra: मुंबई की पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। महाराष्ट्र सरकार ने MHADA एक्ट में संशोधन किया है, जिससे सालों से अटके हुए पुनर्विकास (Redevelopment) प्रोजेक्ट्स
Maharashtra: मुंबई की पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। महाराष्ट्र सरकार ने MHADA एक्ट में संशोधन किया है, जिससे सालों से अटके हुए पुनर्विकास (Redevelopment) प्रोजेक्ट्स को रफ्तार मिल सकती है। यह बदलाव उन लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया है जो हर मानसून में अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे।
महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने जुलाई 2026 के दूसरे हफ्ते में इस संशोधन को मंजूरी दे दी है और अब यह बिल राज्यपाल के हस्ताक्षर का इंतजार कर रहा है। इस नए कानून का मुख्य मकसद सेक्शन 79A और 79B को प्रभावी बनाना है। ये प्रावधान 2020 में लाए गए थे ताकि उन खतरनाक इमारतों का काम शुरू किया जा सके जहाँ मकान मालिक और किरायेदारों के बीच विवाद की वजह से काम रुका हुआ था।
नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी खतरनाक इमारत के कम से कम 51 प्रतिशत निवासी पुनर्विकास के लिए सहमत होते हैं, तो वे आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। साथ ही, अगर मकान मालिक खतरनाक इमारत को दोबारा बनाने में विफल रहता है, तो MHADA इसमें हस्तक्षेप कर सकेगा। इस संशोधन में ‘सक्षम प्राधिकारी’ (Competent Authority) की परिभाषा को साफ किया गया है, जिससे अब MHADA द्वारा अधिकृत अधिकारी नोटिस जारी कर सकेंगे। इससे पहले कानूनी उलझनों की वजह से बॉम्बे हाई कोर्ट ने करीब 935 नोटिसों पर रोक लगा दी थी।
मुंबई की स्थिति काफी गंभीर है, जहाँ 13,000 से ज्यादा ऐसी ‘सेस्ड’ (Cessed) इमारतें हैं जो 1940 से पहले बनी थीं। आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से अगस्त 2025 के बीच शहर में 345 इमारतें पूरी या आंशिक रूप से गिरीं, जिनमें 8 लोगों की जान गई और 28 घायल हुए। इससे भी पहले 1970 से 2018 के बीच इमारत गिरने से 815 मौतें दर्ज की गई थीं।
हाउसिंग राइट्स एक्टिविस्ट और कानूनी जानकारों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में सरकार का पक्ष मजबूत होगा और लोगों के जीवन के अधिकार को प्राथमिकता मिलेगी। MHADA के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मुंबई में क्लस्टर पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।