Maharashtra: मुंबई मेट्रो लाइन 4 और 4A के काम में अब एक बड़ी रुकावट दूर हो गई है। महाराष्ट्र सरकार ने ठाणे के मोघरपाड़ा इलाके में 0.39 हेक्टेयर (करीब 3,900 वर्ग मीटर) मैंग्रोव फॉरेस्ट जमीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
Maharashtra: मुंबई मेट्रो लाइन 4 और 4A के काम में अब एक बड़ी रुकावट दूर हो गई है। महाराष्ट्र सरकार ने ठाणे के मोघरपाड़ा इलाके में 0.39 हेक्टेयर (करीब 3,900 वर्ग मीटर) मैंग्रोव फॉरेस्ट जमीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। इस जमीन का उपयोग मेट्रो कार डिपो के लिए अप्रोच रोड और स्पर लाइन बनाने के लिए किया जाएगा।
मंजूरी की प्रक्रिया और नियम क्या हैं?
इस जमीन के इस्तेमाल की प्रक्रिया 2024 में शुरू हुई थी। केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) ने अक्टूबर 2024 में शुरुआती मंजूरी दी थी और फरवरी 2025 में अंतिम मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद 12 जून 2026 को राज्य के राजस्व और वन विभाग ने औपचारिक आदेश जारी किया। MMRDA को इस जमीन का इस्तेमाल करते समय वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के सभी नियमों का पालन करना होगा, वरना अनुमति वापस ली जा सकती है।
प्रोजेक्ट को लेकर क्या है विवाद और योजना?
एक तरफ सरकार इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है, वहीं मोघरपाड़ा गांव के करीब 198 किसान इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां खेती कर रहे हैं और अब वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी में हैं। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MMRDA को निर्देश दिया है कि मोघरपाड़ा समेत सभी मेट्रो डिपो का इस्तेमाल कमर्शियल, रिटेल और रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के लिए किया जाए ताकि कमाई बढ़ सके।
मैंग्रोव सुरक्षा के लिए क्या है नई पॉलिसी?
मैंग्रोव के संरक्षण के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अप्रैल 2026 में ‘ग्रीन TDR’ पॉलिसी का प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत जो जमीन मालिक अपनी मैंग्रोव वाली जमीन सरकार को सौंपेंगे, उन्हें बदले में TDR (ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स) दिया जाएगा। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ जमीन मालिकों को भी फायदा होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मेट्रो 4 के लिए कितनी मैंग्रोव जमीन ली गई है?
ठाणे के मोघरपाड़ा में कुल 0.39 हेक्टेयर (3,900 वर्ग मीटर) मैंग्रोव फॉरेस्ट जमीन को अप्रोच रोड और स्पर लाइन के लिए डायवर्ट किया गया है।
इस प्रोजेक्ट का विरोध कौन कर रहा है?
मोघरपाड़ा गांव के लगभग 198 किसान इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका दावा है कि इस जमीन पर उनके पुश्तैनी खेती के अधिकार हैं।