Mumbai में हर साल 70 से ज्यादा माताओं की मौत, RTI डेटा में हुआ बड़ा खुलासा

Maharashtra: मुंबई में नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़ों में तो कमी आई है, लेकिन गर्भवती महिलाओं की मौत का सिलसिला अब भी जारी है। स्वास्थ्य विभाग से मिली RTI की जानकारी के मुताबिक, शहर में हर साल औसतन 70 से ज्यादा माताओं की

Maharashtra: मुंबई में नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़ों में तो कमी आई है, लेकिन गर्भवती महिलाओं की मौत का सिलसिला अब भी जारी है। स्वास्थ्य विभाग से मिली RTI की जानकारी के मुताबिक, शहर में हर साल औसतन 70 से ज्यादा माताओं की जान जा रही है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

RTI डेटा के अनुसार, पिछले चार सालों में मुंबई में कुल 325 माताओं की मौत हुई है। साल 2022 से अब तक यह आंकड़ा हर साल 70 से 93 के बीच रहा है। हालांकि, मुंबई के स्थानीय निवासियों के लिए मैटरनिल मॉर्टलिटी रेश्यो (MMR) 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम है, जो अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों के करीब है। लेकिन जब ठाणे, पालघर और महाराष्ट्र के अन्य जिलों से आने वाले मरीजों को इसमें जोड़ा जाता है, तो यह अनुपात बढ़कर 80 के पार चला जाता है।

दूसरी तरफ, बच्चों की सेहत को लेकर अच्छी खबर है। BMC के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नवजात शिशुओं की मौत 2022 में 1,846 थी, जो 2025 तक घटकर 1,148 रह गई। इसी तरह शिशुओं की मौत का आंकड़ा 2,962 से गिरकर 2,069 पर आ गया। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य जागरूकता और बेहतर इलाज की वजह से बच्चों की जान बचाने में कामयाबी मिली है।

सायन हॉस्पिटल के डॉक्टर राहुल मायेकर ने बताया कि बाहरी इलाकों से आने वाले मरीज अक्सर बहुत गंभीर हालत में पहुंचते हैं। दिल की बीमारी या प्लेसेंटा से जुड़ी दिक्कतों के कारण भारी खून बहने से मौतें होती हैं। इसके अलावा मानसून के दौरान मलेरिया, डेंगू और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियां भी गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा बनती हैं।

वहीं डॉक्टर निखिल दातार ने बताया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां प्रेग्नेंसी के जोखिम को बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह भी गौर किया कि अब महिलाओं में स्मोकिंग की आदत बढ़ रही है, जिससे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले बढ़े हैं। उनके मुताबिक, अगर मरीजों की सही समय पर छंटनी (triaging) की जाए, तो इन मौतों को रोका जा सकता है।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत का MMR 2014-16 के 130 से गिरकर 2022-24 में 87 पर आ गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) जैसी योजनाएं चलाई हैं। महाराष्ट्र राज्य में भी 2025-26 में मातृ मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी की जल्द पहचान और तेजी से इलाज ही इसका स्थायी समाधान है।