Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने मुंब्रा के रहने वाले 58 साल के मोहम्मद शेख को 41 साल पुराने सांप्रदायिक दंगे और हत्या के मामले में बरी कर दिया है। यह मामला साल 1988 का है, जिसमें आरोपी को सबूतों के अभाव में दोषमुक
Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने मुंब्रा के रहने वाले 58 साल के मोहम्मद शेख को 41 साल पुराने सांप्रदायिक दंगे और हत्या के मामले में बरी कर दिया है। यह मामला साल 1988 का है, जिसमें आरोपी को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त किया गया। दिलचस्प बात यह है कि जिस शख्स को कोर्ट ने बरी किया, उसे पुलिस ने पिछले महीने ही गिरफ्तार किया था।
क्या था पूरा मामला और कब हुई गिरफ्तारी?
यह घटना सितंबर 1988 में मुंबई के Dongri इलाके में हुई थी, जहाँ बोहरा और सुन्नी मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस हिंसा में Naroddin Mohdali Masalewala की चाकू लगने से मौत हो गई थी। Dongri पुलिस ने 1988 में मामला दर्ज किया था, लेकिन मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी अप्रैल 2026 में हुई। उन्हें एक पुराने गैर-जमानती वारंट के आधार पर करीब 38 साल बाद पकड़ा गया था।
कोर्ट ने बरी करने का क्या कारण बताया?
Additional Sessions Judge Mahesh K Jadhav ने अपने फैसले में कहा कि प्रोसीक्यूशन आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। कोर्ट ने माना कि उस समय हत्या और बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे, लेकिन मोहम्मद शेख की वहां मौजूदगी या हिंसा में उनकी भागीदारी का कोई प्रमाण नहीं मिला। गवाहों और पुलिस अधिकारियों ने भी कोर्ट में शेख की पहचान नहीं की और न ही उन पर किसी खास आरोप की पुष्टि की।
पहले भी हो चुके हैं कई आरोपी बरी
इस केस की सुनवाई काफी लंबी चली है। कोर्ट ने बताया कि इसी मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को साल 2005 और 2007 में पहले ही बरी किया जा चुका था। सबूतों की कमी के कारण अंततः मोहम्मद शेख को भी शनिवार, 3 मई 2026 को कोर्ट से राहत मिल गई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मोहम्मद शेख को कितने साल बाद बरी किया गया?
मोहम्मद शेख को 1988 के सांप्रदायिक दंगे और हत्या के मामले में 41 साल बाद बरी किया गया। उन्हें अप्रैल 2026 में गिरफ्तार किया गया था और मई 2026 में कोर्ट ने फैसला सुनाया।
कोर्ट ने आरोपी को बरी क्यों किया?
Additional Sessions Judge Mahesh K Jadhav ने कहा कि प्रोसीक्यूशन आरोपी को अपराध से जोड़ने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाया और किसी गवाह ने उनकी पहचान नहीं की।