Maharashtra: मुंबई के खेतवाड़ी और लेमिंगटन रोड जैसे इलाकों में LIC की पुरानी चॉलें अब रहने लायक नहीं बची हैं। 137 साल पुरानी अंगरेवाड़ी चॉल जैसी कई इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि वहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों की जान
Maharashtra: मुंबई के खेतवाड़ी और लेमिंगटन रोड जैसे इलाकों में LIC की पुरानी चॉलें अब रहने लायक नहीं बची हैं। 137 साल पुरानी अंगरेवाड़ी चॉल जैसी कई इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि वहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों की जान खतरे में है। पास में चल रहे निर्माण कार्यों की वजह से दीवारों में दरारें आ रही हैं और प्लास्टर गिर रहा है, जिससे लोग डरे हुए हैं।
इमारतों की हालत और सरकारी नोटिस का क्या है मामला?
MHADA ने इन इमारतों को C1 कैटेगरी में रखा है, जिसका मतलब है कि ये रहने के लिए खतरनाक हैं और इन्हें गिराना जरूरी है। मार्च 2026 में MHADA ने धारा 88(3) के तहत नोटिस जारी कर लोगों को तुरंत खाली करने को कहा। वहीं दूसरी तरफ, LIC का कहना है कि 2023 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन इमारतों की मरम्मत की जा सकती है। इस खींचतान के बीच मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट में है कि LIC की प्रॉपर्टी पर MHADA का अधिकार कितना है।
पुनर्विकास (Redevelopment) में देरी और किरायेदारों की मांगें
LIC ने मार्च 2025 में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) नियुक्त करने के लिए टेंडर निकाले थे, ताकि DCPR 33(7) के तहत किरायेदारों को मालिकाना हक मिल सके। लेकिन मई 2026 तक अब तक किसी PMC की नियुक्ति नहीं हुई है और LIC अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में दो साल लग सकते हैं। किरायेदारों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- जल्द से जल्द PMC की नियुक्ति की जाए।
- MHADA नियमों के हिसाब से रहने के लिए वैकल्पिक जगह दी जाए।
- जब तक पुनर्विकास शुरू न हो, तब तक बेदखली रोकी जाए और किराया माफ किया जाए।
- सभी निवासियों को बिना किसी भेदभाव के घर मिले।
केंद्र सरकार और मंत्रियों का क्या आश्वासन है?
अप्रैल 2026 में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री Mangal Prabhat Lodha को भरोसा दिया कि केंद्र सरकार इस मामले को देखेगी। मंत्री Lodha ने 25 LIC इमारतों के करीब 10,000 किरायेदारों की समस्या उठाई थी। वित्त मंत्री ने कहा कि तीन महीने के भीतर इसका समाधान निकाला जाएगा ताकि लोगों को सुरक्षा और घर मिल सके। सुरक्षा के तौर पर LIC ने कुछ इमारतों के चारों ओर सेफ्टी नेट लगाए हैं ताकि राहगीरों और स्कूली बच्चों पर मलबा न गिरे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
LIC चॉल के किरायेदारों के लिए कौन सा नियम लागू है?
इनके लिए DCPR 33(7) नियम का हवाला दिया जा रहा है, जिसके तहत पुनर्विकास के बाद किरायेदारों को नई प्रॉपर्टी में मालिकाना हक मिलने का प्रावधान है।
MHADA और LIC के बीच मुख्य विवाद क्या है?
विवाद इस बात पर है कि इमारतें मरम्मत योग्य हैं या नहीं। MHADA इन्हें गिराने (C1 कैटेगरी) की बात कह रहा है, जबकि LIC की एक रिपोर्ट इन्हें रिपेयर करने योग्य बताती है।