Mumbai में लैंडस्लाइड और बिल्डिंग गिरने से मची तबाही, चेतावनी के बाद भी घरों में रहने को मजबूर लोग
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में भारी बारिश और लैंडस्लाइड ने एक बार फिर डर का माहौल पैदा कर दिया है। 5 जुलाई 2026 को मनखुर्द में एक बिल्डिंग गिरने से 6 लोगों की जान चली गई, जबकि इसी दौरान विक्रोली के पार्कसाइट इलाके में लैं
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में भारी बारिश और लैंडस्लाइड ने एक बार फिर डर का माहौल पैदा कर दिया है। 5 जुलाई 2026 को मनखुर्द में एक बिल्डिंग गिरने से 6 लोगों की जान चली गई, जबकि इसी दौरान विक्रोली के पार्कसाइट इलाके में लैंडस्लाइड की वजह से कई घर तबाह हो गए। प्रशासन बार-बार चेतावनी दे रहा है, लेकिन लोग अपने घरों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।
मुंबई के विक्रोली और भांडुप जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों को BMC ने 8 जून 2026 को ही चेतावनी दे दी थी कि वे सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। लेकिन कई परिवार दशकों से अपने हाथों से बनाए इन घरों में रह रहे हैं, इसलिए वे जोखिम उठाने को तैयार हैं। S वार्ड के असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर ने साफ कहा है कि अगर लोग चेतावनी के बाद भी इन खतरनाक इलाकों में रहते हैं, तो जान-माल के नुकसान के लिए BMC जिम्मेदार नहीं होगी।
मौसम विभाग (IMD) ने 6 जुलाई 2026 को मुंबई और आसपास के जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाई-लेवल मीटिंग की और स्कूलों को बंद करने के साथ-साथ खतरनाक इलाकों से लोगों को हटाने के निर्देश दिए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने निजी ऑफिसों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी और सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की थी। आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, तीन-चार दिनों के भीतर बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई है।
मुंबई प्रशासन अब भविष्य के लिए 13,000 करोड़ रुपये का फ्लड-कंट्रोल प्लान लागू कर रहा है। इस योजना के तहत मुंबई मेट्रोपिटन रीजन की 370 संवेदनशील जगहों पर काम होगा ताकि हाई टाइड के समय 30 मिनट के भीतर पानी उतर सके। इसके लिए सेंसर नेटवर्क और ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार ने 12 सितंबर 2022 को प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित गांवों के पुनर्वास के लिए एक पॉलिसी मंजूर की थी। इस नियम के तहत लोगों को नागरिक सुविधाओं वाले नए इलाकों में बसाने का प्रावधान है। मनखुर्द जैसे इलाकों में कई बस्तियां सरकारी जमीन पर हैं। मेयर रितु तावड़े ने बताया कि मनखुर्द में गिरी बिल्डिंग अवैध थी, लेकिन मरने वाले परिवार उन अधिकृत ढांचों में थे जिन पर वह बिल्डिंग गिरी। सरकारी नियमों के मुताबिक, 2011 से पहले के पात्र निवासियों को हटाने से पहले उन्हें वैकल्पिक जगह देना जरूरी है, जिस वजह से बड़ी आबादी को शिफ्ट करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।