Mumbai के Kanjurmarg लैंडफिल में बदबू कम हुई, Bombay High Court ने BMC से मांगा रिपोर्ट

Maharashtra: मुंबई के कंजूरमार्ग लैंडफिल ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों को अब बदबू से थोड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को यह बात नोट की कि इलाके में दुर्गंध का स्तर पहले के मुकाबले कम हुआ है। हाल

Maharashtra: मुंबई के कंजूरमार्ग लैंडफिल ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों को अब बदबू से थोड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को यह बात नोट की कि इलाके में दुर्गंध का स्तर पहले के मुकाबले कम हुआ है। हालांकि, कोर्ट ने BMC और प्लांट चलाने वाली कंपनी को चेतावनी दी है कि प्रदूषण नियमों का पालन सख्ती से किया जाए।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे ने कहा कि भले ही BMC और MPCB की मशीनरी सक्रिय दिख रही है, लेकिन अभी भी कई जरूरी नियमों का पालन होना बाकी है। कोर्ट ने पाया कि कुछ मौकों पर अभी भी लोगों को परेशानी हो रही है। लैंडफिल ऑपरेटर के वकील साकेत मोने ने बताया कि पहले जहां महीने में करीब 700 शिकायतें आती थीं, वह अब घटकर 218 रह गई हैं।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने BMC और ऑपरेटर को पहले ही कई नोटिस जारी किए हैं, जिनमें बड़ी कमियों और नियमों की अनदेखी का जिक्र है। कोर्ट ने अब BMC और ऑपरेटर को 15 जुलाई 2026 तक एक विस्तृत कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही MPCB को निर्देश दिया गया है कि वह जमीन पर जाकर खुद जांच करे कि दावों के मुताबिक सुधार हुआ है या नहीं।

प्रदूषण कम करने के लिए BMC ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 5,029 पौधे लगाए हैं और 10,000 और पौधे लगाने का वादा किया है, ताकि एक ग्रीन बफर जोन बनाया जा सके। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं है, उनका जिंदा रहना भी जरूरी है।

मामले में कुछ चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील अभिजीत राणे ने सवाल उठाया कि हवा की जांच सही तरीके से नहीं हो रही है। कोर्ट ने भी हाइड्रोजन सल्फाइड, PM 2.5 और PM 10 की निगरानी बढ़ाने की बात कही है। जस्टिस कुलकर्णी ने याद दिलाया कि मीथेन गैस भले ही गंधहीन हो, लेकिन यह खतरनाक है और ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है।