Maharashtra: मुंबई के Kanjurmarg लैंडफिल में बढ़ते प्रदूषण और बदबू ने लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा बनाई गई एक कमेटी ने यहाँ तुरंत मीथेन ऑडिट कराने की सिफारिश की है। यह डंपिंग ग्राउंड दुनि
Maharashtra: मुंबई के Kanjurmarg लैंडफिल में बढ़ते प्रदूषण और बदबू ने लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा बनाई गई एक कमेटी ने यहाँ तुरंत मीथेन ऑडिट कराने की सिफारिश की है। यह डंपिंग ग्राउंड दुनिया के टॉप 25 सबसे ज्यादा मीथेन गैस छोड़ने वाले इलाकों में गिना गया है, जिससे पर्यावरण और सेहत को बड़ा खतरा है।
Kanjurmarg लैंडफिल में क्या समस्या है और कमेटी ने क्या कहा?
Kanjurmarg लैंडफिल मुंबई के रोजाना कचरे का लगभग 86% हिस्सा यानी करीब 6,100 मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस करता है। यहाँ बायो-रिएक्टर तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे कचरा तो जल्दी गलता है लेकिन भारी मात्रा में मीथेन गैस निकलती है। हाई कोर्ट की कमेटी ने बदबू और प्रदूषण को रोकने के लिए AQI मॉनिटर लगाने, ग्रीन बफर जोन बनाने और कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट (Waste-to-Energy) लगाने की सलाह दी है।
सरकार और BMC ने बदबू रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde ने BMC कमिश्नर और अधिकारियों को बदबू कम करने के सख्त निर्देश दिए हैं। अब यहाँ बड़े पैमाने पर बांस के पेड़ लगाए जाएंगे ताकि एक घना ग्रीन बफर जोन बन सके। साथ ही, ज्यादा बदबू फैलाने वाले कामों को रिहायशी इलाकों से कम से कम 500 मीटर दूर शिफ्ट किया जाएगा। BMC ने एक ‘ओडोर डायरी’ भी शुरू की है, जिसमें हर 12 घंटे में बदबू की निगरानी की जा रही है।
हाई कोर्ट की चेतावनी और आगे की योजना क्या है?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC और महाराष्ट्र सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो इस साइट को बंद करने या इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया जा सकता है। इस समस्या को सुलझाने के लिए IIT-Bombay और NEERI के एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। योजना यह है कि कचरे से बिजली और कंप्रेस्ड बायोगैस बनाकर इस लैंडफिल पर निर्भरता को 80% तक कम किया जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Kanjurmarg लैंडफिल दुनिया के टॉप 25 हॉटस्पॉट में क्यों है?
UN के Methane Alert and Response System (MARS) और UCLA की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ से बहुत ज्यादा मीथेन गैस निकल रही है, जो एक खतरनाक ग्रीनहाउस गैस है।
स्थानीय निवासियों को क्या राहत मिलेगी?
सरकार यहाँ बांस के पेड़ लगाकर ग्रीन बफर जोन बनाएगी और बदबू फैलाने वाले कामों को बस्तियों से 500 मीटर दूर ले जाएगी।