Maharashtra: मुंबई के कैलाश पूजारी ने अपनी मेहनत और हुनर से भारतीय कढ़ाई को दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर पहुँचाया है। उनकी कंपनी V V. Exports Universal Pvt. Ltd. के बनाए कपड़े अब Met Gala, Oscars और Golden Globes जैसे बड
Maharashtra: मुंबई के कैलाश पूजारी ने अपनी मेहनत और हुनर से भारतीय कढ़ाई को दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर पहुँचाया है। उनकी कंपनी V V. Exports Universal Pvt. Ltd. के बनाए कपड़े अब Met Gala, Oscars और Golden Globes जैसे बड़े इवेंट्स में नजर आते हैं। उन्होंने साबित किया है कि हाथ से की गई बारीकी वाली कढ़ाई की मांग आज भी दुनिया भर में है।
कैलाश पूजारी का सफर और उनकी कंपनी
कैलाश पूजारी ने अपने करियर की शुरुआत 90 के दशक में फैशन शो कोरियोग्राफ करने से की थी। बाद में उन्हें कढ़ाई के काम से लगाव हुआ और साल 2004 में उन्होंने V V. Exports Universal Pvt. Ltd. की शुरुआत की। उनकी कंपनी पारंपरिक कला और नई तकनीकों को मिलाकर हाई-फैशन कपड़े तैयार करती है। आज दुनिया के बड़े ब्रांड्स अपने खास डिज़ाइन के लिए भारतीय कारीगरों और कैलाश की टीम पर भरोसा करते हैं।
हाथ की कढ़ाई और सस्टेनेबिलिटी पर जोर
कैलाश पूजारी का मानना है कि अब लोग मशीन से बने कपड़ों के बजाय हाथ से बनी चीजों की कीमत समझने लगे हैं। वे अपनी कंपनी में केवल ‘मेड-टू-ऑर्डर’ यानी ऑर्डर मिलने पर ही सामान बनाते हैं ताकि फिजूलखर्ची और मास प्रोडक्शन से बचा जा सके। सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता देते हुए वे बचे हुए मोतियों और कपड़ों को गैर-लाभकारी संस्थाओं (NGOs) को दान कर देते हैं।
ग्लोबल फैशन में भारतीय मोटिफ्स का बदलाव
कैलाश के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भारतीय कढ़ाई और मोटिफ्स को हर सीजन में नए तरीके से बदला जाता है। दुनिया भर के डिज़ाइनर भारतीय कारीगरी को पसंद कर रहे हैं क्योंकि इसमें एक कहानी और मेहनत जुड़ी होती है। भारत आज भी दुनिया के लिए हाउते कॉउचर (Haute Couture) और हाई-फैशन कढ़ाई का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कैलाश पूजारी की कंपनी का नाम क्या है और यह क्या काम करती है?
उनकी कंपनी का नाम V V. Exports Universal Pvt. Ltd. है। यह कंपनी हाई-फैशन टेक्सटाइल और हाथ की बारीकी वाली कढ़ाई का काम करती है, जो दुनिया के बड़े फैशन इवेंट्स में इस्तेमाल होती है।
कैलाश पूजारी पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी के लिए क्या करते हैं?
वे केवल ऑर्डर पर ही सामान बनाते हैं ताकि फालतू उत्पादन न हो। साथ ही, काम के बाद बचे हुए कपड़े और मोतियों को वे NGO को दान कर देते हैं।