Maharashtra: मुंबई के लोगों के बीच इन दिनों जापान की एक खास कला ‘किन्त्सुगी’ (Kintsugi) काफी लोकप्रिय हो रही है। बॉम्बे टाइम्स ने अपने ‘BT Life.Styled Club’ के बैनर तले एक वर्कशॉप का आयोजन किया, ज
Maharashtra: मुंबई के लोगों के बीच इन दिनों जापान की एक खास कला ‘किन्त्सुगी’ (Kintsugi) काफी लोकप्रिय हो रही है। बॉम्बे टाइम्स ने अपने ‘BT Life.Styled Club’ के बैनर तले एक वर्कशॉप का आयोजन किया, जिसमें लोगों ने टूटी हुई चीजों को फिर से जोड़कर उन्हें सुंदर बनाना सीखा। इस सेशन का मकसद कला और दर्शन के जरिए मानसिक शांति और रचनात्मकता को बढ़ावा देना था।
किन्त्सुगी आर्ट क्या है और इसमें क्या होता है
किन्त्सुगी जापान की लगभग 400 साल पुरानी कला है। इसमें टूटी हुई मिट्टी के बर्तनों या सिरेमिक को सोने या धातु के पाउडर से जोड़ा जाता है। इस कला का मानना है कि टूटी हुई चीजें और उनके निशान उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी कहानी और मजबूती को दर्शाते हैं। बॉम्बे टाइम्स के इवेंट में लोगों ने प्लांटर्स को तोड़कर उन्हें फिर से सावधानी से जोड़ा और उन्हें एक नया रूप दिया।
मुंबई में कहाँ हो रहे हैं ये वर्कशॉप
मुंबई में इस कला को सीखने के लिए कई जगह वर्कशॉप चल रहे हैं। 22 मई 2026 को गोरेगांव के Hitchki Nesco में दोपहर 3:15 से 5:15 बजे तक एक सेशन रखा गया था। इसके अलावा BookMyShow पर 22 मई से 31 मई 2026 तक ‘किन्त्सुगी आर्ट थेरेपी’ के वर्कशॉप लिस्टेड हैं। लोग Moxy Mumbai Andheri West, Olive Cafe BKC और Powai के Rude Lounge जैसे स्थानों पर भी इस जापानी कला को सीख रहे हैं।
इस कला से क्या फायदा मिलता है
विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ एक आर्ट नहीं बल्कि एक थेरेपी की तरह है। यह लोगों को अपनी कमियों को स्वीकार करने और जीवन में मुश्किलों के बाद फिर से संभलने की सीख देती है। इसमें टूटे हुए हिस्सों को छिपाने के बजाय उन्हें सोने से चमकाया जाता है, जो मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-स्वीकृति के लिए अच्छा माना जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
किन्त्सुगी वर्कशॉप मुंबई में कहाँ-कहाँ उपलब्ध हैं?
मुंबई में Hitchki Nesco (गोरेगांव), Moxy Mumbai Andheri West, Olive Cafe (BKC) और Rude Lounge (पोवई) जैसे स्थानों पर ये वर्कशॉप आयोजित किए जा रहे हैं।
किन्त्सुगी कला का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य टूटी हुई सिरेमिक चीजों को सोने के इस्तेमाल से जोड़कर उन्हें और सुंदर बनाना है, जो लचीलेपन और आत्म-स्वीकृति के दर्शन को बढ़ावा देता है।